भदोही। 27वीं शबे कद्र की रात नगर के तकिया कल्लन शाह जामा मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों में मंगलवार को पूरी रात इबादत का दौर चला। इस दौरान हुए शबीना में कई हुफ्फाज ने मिल कर पूरा कुरआन पढ़कर मुकम्मल किया। भोर में शबीना पूरा होने पर हुफ्फाज एकराम के इस्तकबाल के साथ उनकी दस्तार तथा गुलपोशी कर नजराना पेश किया गया।
इस्लाम में शबे कद्र की खास अहमियत है। इसी रात कुरान नाजिल किया गया था। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्ल. ने रमजान की आखिरी दस रातों में शबे कद्र तलाशने का हुक्म दिया है। शबे कद्र 21वें रोजे से आखरी रोजे के दर्मियान ताक रातों (जो दो की संख्या से न कट पाए) यानि 21, 23, 25, 27, 29 को होता है। मंगलवार की रात तकिया कल्लन शाह जामा मस्जिद, घमहापुर और आलमपुर नई बस्ती की मस्जिदों में शबीना पढ़ी गई। मस्जिदों में रातभर चहल-पहल रही। बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग और महिलाएं इबादत में मशगूल रहीं। प्रमुख मस्जिदों में करीब तीन दर्जन हुफ्फाज ने हिस्सा लिया। शबीना खत्म होने पर हुफ्फाज की दस्तारबंदी कर इस्तकबाल किया गया। सुबह मस्जिद में ही लोगों ने सहरी भी की। जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज परवेज अच्छे न बताया कि तरावीह में जहां कई दिनों में कुरआन मुकम्मल की जाती है, वहीं शबीना में एक ही रात में कुरआन को पढ़कर पूरा किया जाता है। शबीना में हाफिज अलीरजा, हाफिज शाहनवाज, हाफिज फहद, हाफिज शाह आलम, हाफिज अशरफ, हाफिज अब्दुल्लाह, हाफिज अराफात, हाफिज आलीशान, हाफिज अब्दुल माबूद, हाफिज इरफान, हाफिज शहजाद, हाफिज मेराज, हाफिज नासिर, हाफिज हसन शामिल रहे।