वाराणसी। हुनर और हौसले की चमक के बीच काशी विद्यापीठ में लगी कला प्रदर्शनी हर किसी के आकर्षण का केंद्र बन गई है। छात्र-युवाओं द्वारा बनाई गईं कृतियां एक से बढ़कर एक हैं। उन्होंने पूरी शिद्दत से अपनी कल्पनाओं को आकार दिया है और अपने हुनर की चमक बिखेरी है। पेंटिंग्स की अपनी खासियतें हैं तो मूर्तिकला और चित्र कला की कृतियों का कहना ही क्या। गृहसज्जा की खूबसूरत वस्तुओं के साथ ही आर्टिफिशियल ज्वैलरी भी युवाओं की नायाब कलाकारी का नमूना पेश कर रहे हैं।
विद्यापीठ के ललित कला विभाग की ओर से गंगापुर परिसर में आयोजित इस कला मेले में युवाओं का जोश और हुनर देखते बन रहा है। मंगलवार को दूसरे दिन भी लोग अपना छविचित्र (पोट्रेट) बनवाने के लिए उतावले नजर आए। वहीं लोगों को ‘जंगल बुक’ की सैर करने का भी मौका मिला। यहां खान-पान के साथ खेल का आनंद भी लोगों ने लिया।
अनुपयोगी वस्तुओं से बनी गांधी जी की तीन खूबसूरत चित्रों को खूब सराहा गया। कला मेले में कुल 32 स्टॉल के साथ ही 140 कलाकृतियां कला दीर्घा में प्रदर्शित हैं। इसमें ललित कला विभाग, फैशन डिजाइन, मंचकला, जीवनदीप महाविद्यालय, गंगापुर परिसर आदि छात्रों की कलाकृतियां हैं। जलरंग की ओर से प्रकृति चित्रण, बुद्ध के जीवन पर आधारित कृतियां, विभिन्न मुद्राओं पर पोस्टर, डिजाइनिंग, टेक्सटाइल डिजाइनर, ड्राइंग मूर्तिकला, चित्रकला, गृहसज्जा से जुड़ी तमाम सामग्री भी उपलब्ध हैं। इसमें आकाश, सूरज, राहुल आदि की कलाकृतियां शामिल हैं। शाम को सुभ्रा वर्मा के निर्देशन में रविंद्र नाथ टैगोर की लिखित चांडालिका नाटक का मंचन हुआ।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. मंजुला चतुर्वेदी, प्रो. प्रेमचंद्र विश्वकर्मा, डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, डॉ. शत्रुघभन प्रसाद, डॉ. रामराज, डॉ. रामराज, डॉ. अनूप घोष, डॉ. सविता यादव, विजय चालम, आकाश कुमार सेठ, अलका अस्थाना आदि शामिल रहे।