वाराणसी। काशी में भगवा किला 22 सालों बाद भी विरोधी फतह नहीं कर पाए। महापौर पद पर भारतीय जनता पार्टी ने लगातार पांचवीं बार भाजपा ने अपना परचम लहराया है। पार्टी की नवनिर्वाचित महापौर मृदुला जायसवाल पिछड़ा वर्ग से आने वाली पहली और शहर की दूसरी महिला महापौर हैं। पहली महिला महापौर 1995 में भाजपा की ही सरोज सिंह चुनी गई थीं। लगातार पांचवीं बार महापौर पद पर जीत से भाजपाई खासे उत्साहित हैं। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में भगवा परचम लहराने की खुशियां लखनऊ से दिल्ली तक छाई हुई हैं।
नगर निगम से पहले वाराणसी को नगर महापालिका का दर्जा प्राप्त था। तब यहां 1960 से 1994 तक नगर प्रमुख निर्वाचित हुआ करते थे। वर्ष 1995 में नगर निगम बनने के बाद महापौर पद की सीट सामान्य थी और भाजपा ने सरोज सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था और जीत मिली थी। इसके बाद से मौजूदा चुनाव तक हर बार यहां बार यहां भगवा परचम लहराया। क्रमश: अमरनाथ यादव, कौशलेंद्र सिंह और राम गोपाल मोहले महापौर निर्वाचित हुए। अब मृदुला जायसवाल काशी की प्रथम नागरिक के तौर पर महापौर की जिम्मेदारी संभालेंगी।
कांग्रेस, सपा और बसपा अपनी तमाम मशक्कतों के बावजूद भाजपा के इस गढ़ में सेंध नहीं लगा पाई। समीकरणों के उतार-चढ़ाव के बीच भाजपा के नगर निगम के लंबे कार्यकाल और यहां की खस्ताहाल बुनियादी सुविधाओं को भी विपक्षियों ने मुद्दा बनाया। विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं ने चुनावी सभाएं कीं लेकिन इतना सबके बाद भी जनता ने भाजपा पर भरोसा कायम रखते हुए जीत दिला दी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की इस जीत को सियासत के जानकार बेहद अहम मान रहे हैं।