वाराणसी। संतूर वादन और गायन के साथ तीन दिवसीय श्रीमठ संगीत महोत्सव की शुरुआत हुई। बुधवार को नागरी नाटक मंडल में जगतगुरु रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य महाराज ने दीप जलाकर कार्यक्रम शुरू किया। संस्थापक सदस्य अरुण शर्मा ने जगतगुरु को माल्यार्पण पहनाकर अभिनंदन किया। संगीतज्ञ प्रो. राजेश्वर महाराज ने कहा कि महाराज की प्रेरणा से आयोजित कार्यक्रम मानवीय चेतना को आनंदमयता के माध्यम से दिव्य चेतना में रूपांतरित करने का माध्यम है।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमठ के वेदाचार्य पंडित उपेंद्र मिश्र व सहयोगी बटुकों ने वैदिक स्वस्तिवाचन हुआ। मंच पर संतूर वादक कुमार सांरग ने तबला संगत श्रुतिशील का माल्यार्पण किया गया। कुमार सारंग ने आलाप, जोड़ के साथ मध्य झपताल में निबद्ध गत से प्रभावित किया। प्रशासनिक अधिकारी मुरलीधर मिश्र ने दोनेां कलाकारों को स्मृति चिह्न दिया। साहित्यकार पंडित जितेंद्रनाथ मिश्र का कार्यक्रम हुआ। बंगलूरु की गायिका संगीता कट्टी कुलकर्णी के साथ तबले पर नंदकिशोर मिश्र, हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र, तानपुरे पर स्वाति, पायल रही। संगीता ने राग की आलापचारी से लोगों को निमग्न किया। राग केदार में विलंबित तीन ताल में निबद्ध बंदिश सुनाया। बोल थे पायो पायो मोरी राम नाम धन। इस मौके पर अशोक कपूर, पूर्व आईजी रंजन द्विवेदी, अमूल्य शर्मा, डा. प्रीतेश आचार्य मौजूद रहे।