खेल विभाग की ओर से 16 खेलों के छात्रावास में प्रवेश के लिए प्रदेश के 14 जिलों में संचालित है। इसमें हर साल 12 से 15 साल तक के बच्चों का प्रवेश होता है। जिला और मंडल स्तर पर आयु प्रमाणिकता के लिए आधार कार्ड और नगर निगम के जन्म प्रमाण सहित स्कूली दस्तावेज मान्य होते है। साथ ही प्रदेश स्तर में चयन के लिए सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट ही आयु की प्रमाणिकता का वैध दस्तावेज मानी जाती है।
20 को ही सीएमओ को भेजी गई थी सूचना
वाराणसी मंडल की क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी विमला सिंह ने बताया कि खिलाड़ियों की मेडिकल जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 20 फरवरी को पत्र भेजा गया था। 20 से 25 फरवरी के बीच जिला स्तरीय और 27 फरवरी से तीन मार्च तक मंडल स्तरीय चयन प्रतियोगिता के बाद मंडल की टीम में खिलाड़ियों का चयन हुआ। चयनित खिलाड़ी जब जांच के लिए अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल में संसाधन की कमी के कारण कई खेलों के खिलाड़ियों की जांच ही नहीं हुई। जिनकी जांच हुई उनको समय से रिपोर्ट नहीं मिली।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि तीन मार्च को जब खिलाड़ियों को कबीर चौरा के मंडलीय अस्पताल में जांच कराने के लिए भेजा गया तो जांच कराने के बजाय उन्हें वहां से रामनगर के राजकीय अस्पताल में भेजा दिया गया। खिलाड़ियों के रामनगर पहुंचने पर पता चला कि वहां की एक्स-रे मशीन खराब है। इसके बाद उन्हें दुर्गाकुंड स्थित नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। यहां खिलाड़ियों के दातों की गिनती कर तीन दिन बाद रिपोर्ट देने को कहा गया। ऐसे में पांच मार्च से जिनका आगरा, अयोध्या, कानपुर जैसे जिलों में ट्रायल था वो रिपोर्ट के बिना चयन का हिस्सा नहीं बन सके।
क्या बोले अधिकारी
मंडलीय अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट है जिस पर 400 से अधिक लोगों के जांच और रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी है। जांच की प्रक्रिया में समय लगता है। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ