वाराणसी। पंचदसनाम जूना अखाड़ा और पंचदसनाम आवाहन अखाड़े के संतों की बुधवार को पेशवाई निकली। खिचड़ी दही खाकर जूना अखाड़ा के संत बैजनत्था से हनुमान घाट स्थित जूना अखाड़ा पहुंचे और कबीरचौरा से आवाहन अखाड़े के संत दशाश्वमेध घाट पर पहुंचे। बैंड बाजा और रथों पर सवार होकर निकले संत पूरे रास्ते करतब दिखाते हुए चल रहे थे। ये संत काशी में होली तक रहेंगे और महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करेंगे।
कुंभ में कल्पवास के बाद काशी पहुंचे संतों की पेशवाई बुधवार को शुभ मुहूर्त में निकली। इसमें बैजनत्था मठ से भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने के बाद दही और खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। जूना अखाड़े के अध्यक्ष महंत प्रेमगिरि की अगुवाई में सैकड़ों नागा संतो के साथ संत महात्मा ने पेशवाई शुरू की। यात्रा में आगे आगे डमरू दल और बैंडबाजा थे। जिनके ठीक बाद भगवान दत्तात्रेय की पालकी यात्रा और नागा संतों की टोली चल रही थी। जूना अखाड़े की पेशवाई में श्रीमंत उमाशंकर भारती, उपाध्यक्ष देवेंद्र पुरी, रमता पंच के चार श्रीमंत भल्लन गिरी महाराज, मालपुरी महाराज, रमणगिरी महाराज, और सुरेशानंद महाराज शामिल रहे।
वहीं पंचदसनाम आवाहन अखाड़े की पेशवाई कबीरचौरा से निकली। इसमें अखाड़े के देवता, गणेश भगवान और निशान लेकर संतों की पेशवाई शुरू हुई। श्रीमंत पूनम गिरी, सभापति महंत नीलकंठ गिरी रमता पंच के महंत शरीद भारती, चेतनगिरी और पंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवेश गिरी महाराज की देखरेख में यात्रा निकली। इस अखाड़े के महंत हर हर महादेव के जयकारी के साथ करतब दिखाते हुए संतों की टोली मैदागिन, नीचीबाग, चौक, बांसफाटक, गोदौलिया होते हुए दशाश्वमेध घाट स्थित पंचदसनाम आवाहन अखाड़े पर पहुंची।
सुरक्षा को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। संतों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों के किनारे खडे़ रहे। जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई।