वाराणसी। अर्दली बाजार स्थित न्यू उमंग नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. शिल्पी राजपूत की मौत नशे के इंजेक्शन की ओवरडोज से हुई। पोस्टमार्टम में प्रथम दृष्टया मौत का कारण ओवरडोज बताया जा रह है। जांच के लिए बिसरा को लखनऊ भेजा दिया गया। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने पोस्टमार्टम होने के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बेटे उमंग ने डॉ. शिल्पी को मुखाग्नि दी। इस दौरान शहर के कई चिकित्सक भी मौजूद रहे।
प्रसूती और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी ने गुरुवार की आधी रात दो जहरीले इंजेक्शन लगाकर जान दे दी थी। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि प्रथमदृष्टया मौत का कारण ओवर डोज है। लखनऊ में बिसरा परीक्षण के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं महिला चिकित्सक के बांये हाथ में इंजेक्शन लगे स्थान का भी कुछ अंश काटकर सुरक्षित रख लिया गया है।
बेटे ने दिया था मां का साथ
सरकारी चिकित्सक डॉ. डीपी सिंह की 11 वर्ष पूर्व हुई हत्या की साजिश रचने के आरोप में पत्नी डॉ. शिल्पी सहित छह अन्य आरोपी बरी कर दिए गए थे। इस दौरान प्रसूती एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी के बेटे उमंग (उस समय नाबालिग था) ने मां का साथ दिया था। डॉ. शिल्पी के नर्सिंग होम का नाम भी बेटे के ही नाम पर था। बेटे के लिए अलग से केबिन तक बनी थी। डॉ. डीपी सिंह की 11 वर्ष पहले 13 सितंबर 2007 को पांडेयपुर क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में डॉ. शिल्पी को हत्या की साजिश रचने के आरोप में छह अन्य आरोपियों के साथ जेल भेजा गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। बाद में सभी को कोर्ट ने बरी कर दिया था और केस खत्म हो गया। मौत से पहले बेटे में पति का रूप देखने और मारपीट का आरोप तक डॉ. शिल्पी ने लगाए। डॉ. शिल्पी के पास मिले सुसाइड नोट में बेटे उमंग पर आरोप लगाया है कि वह उनकी हत्या करना चाहता था और संपत्ति हड़पना चाहता है। पुलिस मौत के कारणों की जांच में जुटी है।