वाराणसी। काशी में गंगा दशहरा पर भी श्रद्धालुओं को स्नान के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। अपने अवतरण दिवस पर भी गंगा रूठी हुई हैं। भीषण तपिश के बीच जलस्तर में लगातार गिरावट से हालात बेहद चिंताजनक हैं। प्रवाह थमने के कारण बढ़ते प्रदूषण से स्थितियां ऐसी हैं कि अधिकतर घाटों पर जल आचमन और स्नान योग्य भी नहीं रह गया है। हालात को देखते हुए गंगा में जल छोड़ने के लिए महीने भर पहले जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शासन और सिंचाई विभाग को पत्र भेजा था लेकिन उसका भी कहीं कोई असर नहीं हुआ।
जल न छोड़े जाने से गुरुवार को गंगा दशहरा पर हजारों श्रद्धालुओं को दिक्कतें होंगी। जलस्तर खिसकने से गंगा का पाट भी सिमटता जा रहा है। जल छोड़ने के लिए जिलाधिकारी की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद से जलस्तर में 40 सेंटीमीटर से ज्यादा का घटाव हुआ है लेकिन उसके बाद जल छोड़ने के लिए अब तक कोई पहल नहीं हुई है। नतीजतन, गंगा का जलस्तर आठ साल के न्यूनतम स्तर पर है।
जलस्तर में साल दर साल गिरावट
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो साल दर साल गंगा के जलस्तर में गिरावट सामने आ रही है। 2015 में गंगा का न्यूनतम जलस्तर 58.67 मीटर था, जबकि 2016 में इसमें और गिरावट दर्ज हुई और गंगा का जलस्तर 58.52 मीटर रिकॉर्ड किया गया। 2017 में ये घटकर 58.27 मीटर रह गया। जबकि 24 अप्रैल 2018 को वाराणसी में गंगा का जलस्तर आठ सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया और वाटर लेवल 58.1 मीटर रिकॉर्ड हुआ। अब यह रिकॉर्ड भी टूट गया है। 22 मई 2018 को केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 57.84 मीटर रिकॉर्ड किया है, जो पिछले साल इसी तारीख को 58.33 मीटर दर्ज किया गया था।