ज्ञानपुर/सीतामढ़ी। ग्रामीण इलाकों में स्थापित पेयजल इकाइयां बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। जिले में 35 पेयजल इकाइयों में 25 की हालत खस्ता है। कहीं पाइप लाइन ध्वस्त हो चुकी है तो कहीं जलस्तर खिसक जाने या मोटर जल लाने से जलापूर्ति ठप है। वहीं, करीब डेढ़ हजार से ज्यादा हैंडपंप खराब हैं, जिन्हें रीबोर नहीं कराया गया। जिला प्रशासन और जल निगम की इस लापरवाही के चलते गर्मी में ग्रामीणों को पेयजल संकट से जूझना पड़ सकता है।
सभी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो दशक पूर्व ज्ञानपुर जिला मुख्यालय समेत डीघ, सुरियावां, महाराजगंज, चौरी इलाकों में 35 पेयजल इकाइयों स्थापित की गई थीं। टंकी का निर्माण कराने के साथ पाइप लाइन बिछाकर गांव-गांव पानी की आपूर्ति की जाती है। देखरेख और मरम्मत के अभाव में ये इकाइयां जर्जर हो चुकी हैं। कहीं पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है तो कहीं की मोटर जल गई है। कई जगह जलस्तर खिसक जाने के कारण जलापूर्ति नहीं हो पा रही। सीतामढ़ी संवाददाता के अनुसार, कोनिया क्षेत्र की मठहा (बारीपुर), डीघ, और इटहरा में समूह पेयजल इकाइयां बदहाल हैं। मठहा और बारीपुर में तो लगभग तीन दशक बाद भी ओवर हेड टैंक का निर्माण नहीं कराया गया। इनसे जुड़े गांवों में जल निगम के ट्यूबवेल से सीधी आपूर्ति होती है। जगह-जगह पाइप लाइन ध्वस्त हो जाने की वजह से कई गावों के पानी की आपूर्ति कई वर्षों से ठप है। इसी तरह डीघ इकाई जिस गांव में स्थापित है, उसी गांव के सभी मुहल्लों को जलापूर्ति नहीं हो पा रही। इटहरा पेयजल इकाई विभागीय लापरवाही के चलते लगभग दो वर्षो से बंद पड़ी है।
इसके अलावा छह ब्लॉकों में डेढ़ हजार से ज्यादा हैंडपंप रीबोर न होने की वजह से सूखे पड़े हुए हैं। बार-बार शिकायतों के बाद भी ग्राम पंचायतों ने अभी तक इनकी मरम्मत नहीं कराई। अगर ऐसी ही लापरवाही जारी रही तो गर्मी में ग्रामीणों को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा। डीघ गांव के निवासी कमला शंकर मिश्रा, राजू सिंह, नंघू तिवारी, अजय सिंह चौहान, शिवपूजन शुक्ला शास्त्री, सरकार शुक्ल ने पेयजल इकाइयों और हैंडपंपों की मरम्मत कराकर जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की मांग की है।