वाराणसी। शिव की नगरी काशी के अर्द्धचंद्राकार घाटों पर नवसंवत्सर के स्वागत में अस्सी से राजघाट तक हुए विविध आयोजनों का सिलसिला ब्रह्म मूहूर्त से आरंभ होकर देर शाम तक चलता रहा। गीत-संगीत, वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोचार के साथ विक्रम संवत-2075 का काशीवासियों ने स्वागत किया। हर-हर महादेव के जयघोष और भगवान भाष्कर के नमन के साथ सभी घाटों पर नव संवत का स्वागत किया गया। संपूर्ण विश्व में शांति और सौहार्द के संकल्प को दोहराया गया।
भक्तिभाव में डूबी काशी में जैसे ही भगवान भाष्कर ने अपनी लालिमा बिखेरी तो लोगों ने सूर्य नमस्कार, अर्घ्य व दीपदान कर नवसंवत्सर का जोरदार अभिनंदन किया। राजघाट पर पहल एवं संस्कार भारती के मंच पर आयोजित संगीत संध्या अनवरत जारी रही। मनहर उधास के गायन के बाद ब्रह्ममूहूर्त में स्थानीय लोगों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर सभी के मंगल की कामना की। शांति के प्रतीक 21 कबूतर और गुब्बारे हवा में उड़ाकर राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी और कार्यक्रम संयोजक आलोक पारिख ने शुभकामनाएं दीं। शंकराचार्य घाट पर द्वारिका और शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य व श्री विद्यामठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सनातनी पंचांग का विमोचन किया। वहीं बटुकों ने योग के आसनों का लाजवाब प्रदर्शन किया। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती न्याय वेदांत महाविद्यालय के बटुकों ने गंगा के किनारे नित्य प्रति गाए जाने वाले राष्ट्रगीत की प्रस्तुति दी और राष्ट्रध्वज के सम्मान में पथ संचलन किया।