वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र में गंगा पाथ-वे की योजना के लिए सर्वे के बाद चिह्नित 166 भवनों में से सभी को नहीं ढहाया जाएगा। केवल पौराणिक महत्व की धरोहरों पर कब्जा करने वालों पर ही कार्रवाई की जाएगी। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विशाल सिंह ने सोमवार को धरोहर बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पक्का महाल के चिह्नित 166 भवनों को जमींदोज करने की योजना ही नहीं है।
सोमवार को धरोहर बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मुख्य कार्यपालक अधिकारी से मिले। समिति की ओर से उन्हें 17 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया। कहा गया कि धरोहरों से किसी सूरत में छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। विकास योजनाओं के नाम पर मंदिर परिक्षेत्र और पक्का महाल के मौलिक स्वरूप से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डेढ़ घंटे की वार्ता के दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि मंदिर विस्तारीकरण सहित जो भी योजनाएं प्रस्तावित हैं, उन्हें क्षेत्रीय निवासियों के सुझावों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा, डॉ. सुधांशु शेखर, विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार शर्मा, समाजसेवी राज कपूर, शशिधर इस्सर, मणिशंकर त्रिपाठी, योगेंद्र नाथ व्यास, सुनील मेहरोत्रा, मदन यादव आदि शामिल थे।