वाराणसी। अवैध निर्माण और अनियोजित विकास से शहर का बेड़ा गर्क करने में जिम्मेदार विभागों के अफसरों की भूमिका भी कुछ कम नहीं है। वरुणा और असि जैसी पौराणिक नदियों के तटों से तलहटी तक अवैध निर्माण होते रहे और ये अधिकारी रुपयों के लालच में चुपचाप सब देखते रहे। यही नहीं, शहरी सीमा और बाहरी इलाके में अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो गए लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों के नकारेपन की वजह से आज दोनों नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। जनप्रतिनिधियों ने भी शहर की पहचान को बचाने के लिए कभी ठोस प्रयास नहीं किए।
वरुणा के किनारे 50 मीटर के दायरे में निर्माण वर्जित होने के बावजूद हुए नदी की तलहटी तक भवनों से लेकर होटल, मॉल और मल्टीस्टोरी बिल्डिंगें तक बना ली गईं। इसके लिए वीडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग, सब बराबर के जिम्मेदार हैं। वीडीए की अनुमति के बिना लगातार अवैध निर्माण होते रहे और नगर निगम भी इन भवनों को मकानों नंबर और नक्शा जारी करता रहा। वहीं, नदी किनारे की जमीन के संरक्षण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होती है लेकिन इस विभाग की ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई। राजस्व विभाग भी ने इस पर अंकुश लगाने की जरूरत नहीं समझी। अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की योजना कागज पर तो कई बार बनी मगर धरातल पर नहीं उतर सकी।