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प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल की नियुक्तियों को लेकर धुकधुकी बढ़ी

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वाराणसी। बीएचयू में कुलपति रहते हुए अयोग्य लोगों की नियुक्तियां करने के प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी के बयान के बाद सोमवार को चर्चाओं का बाजार गरम रहा। परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं करने के साथ ही लोग उनके कार्यकाल में हुईं नियुक्तियों पर सवाल भी उठाते रहे। वहीं, कुलपति से करीबी बढ़ा कर अपने परिवार के सदस्यों को नौकरी दिलाने वाले, महापुरुषों के नाम पर स्थापित चेयर और सेवानिवृत्ति के बाद भी महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने वाले अधिकारियों की धुकधुकी भी बढ़ गई है। बयान पर राजनीति भी तेज हो गई है। इसलिए उन्हें चिंता सताने लगी है कि यदि इस मामले ने तूल पकड़ा तो उन पर गाज गिर सकती है।
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अपने कार्यकाल के अंतिम दिन आयोजित विदाई समारोह में कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने मजबूरी में कई अयोग्य लोगों की नियुक्तियां करने का बयान दिया था। अब उनके बयान को लेकर शिक्षकों और अधिकारियों-कर्मचारियों से लेकर छात्र-छात्राओं तक में खूब चर्चाएं हो रही हैं। वहीं, वे लोग सकते में आ गए हैं, जिनकी नियुक्तियां उनके कार्यकाल में हुई हैं। कौन योग्य था और किनकी नियुक्तियां अयोग्य होने के बावजूद की गईं, इन सब पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और अधिकारियों के कुछ पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। एक अधिकारी की नियुक्ति के लिए तो नया पद तक सृजित किया गया। विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर सेवा कर चुके एक अधिकारी को सलाहकार बनाया गया। इतना ही नहीं, पुलिस विभाग में बड़े पद पर आसीन रहे एक अधिकारी को भी सलाहकार बनाया गया था। कुछ चेयर और बड़े केंद्रों पर भी अधिकारियाें और शिक्षकों के सगे संबंधियों को अहम जिम्मेदारियां देने की चर्चाएं खूब रहीं। प्रो. जीसी के बयान पर राजनीति भी तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच हुई तो कई लोग नप सकते हैं।
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