वाराणसी। काशी को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद दो साल पहले शुरू हुई तो लगा कि इस सपने को साकार करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। लेकिन अब तंग गलियों के शहर में बुनियादी सुविधाओं को नया आकार देने, यहां की संस्कृति, परंपरा और विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता का रंग देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सिंतबर 2016 में स्मार्ट शहरों की सूची में बनारस के शामिल होने के बाद पहले चरण में यातायात प्रबंधन के लिए चौराहों, सड़कों, कूड़ा, सफाई, पार्क, कुंडों के साथ ही अस्तित्व के लिए जूझ रही असि नदी को नवजीवन देने की योजना अब जल्द ही परवान चढ़ेगी। तीन महीने के अंदर इसकी स्मार्ट सिटी की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर बुनियादी सुविधाओं को नया रंग देना का काम शुरू कर दिया जाएगा।
असि नदी के किनारों पर हरियाली लुभाएगी
स्मार्ट सिटी योजना में विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी वाराणसी की अहम विरासत असि नदी को नवजीवन देने की तैयारी है। इस योजना में नदी की सफाई से लेकर उसके दोनों किनारों को हरा-भरा करने पर काम होगा। अरसे बाद नगर निगम ने इस नदी की सुधि ली और इसे स्मार्ट सिटी योजना में पहली बार शामिल किया गया।
शहर के 34 चौराहे होंगे हाईटेक
स्मार्ट सिटी के तहत शहर के 34 चौराहों को हाईटेक किया जाएगा। इन चौराहों पर सीसीटीवी के साथ ही इससे जुड़ने वाली सड़कों को भी दुरुस्त किया जाएगा। साथ ही यह भी तय होगा कि कौन सा मार्ग पैदल, दो पहिया, चार पहिया के लिए निर्धारित किया जाए। इसका सर्वे शुरू करा दिया गया है।
कुंडों और तालाबों की बदलेगी सूरत
सीएएसआर के तहत शहर के कई कुंडों और तालाबों को संवारने का काम चल रहा है। अब स्मार्ट सिटी के अंतर्गत भी कंपनी बाग स्थित मंदाकिनी और रामकुंड को सुंदर बनाए जाएगा। वहीं शहर के चार पार्कों को भी चिह्नित कर उनका कायाकल्प किया जाएगा। इन जगहों पर आकर्षक लाइट, फाउंटेन, पाथवे, बेंच, बच्चों के लिए झूले आदि की व्यवस्था की जाएगी।
गोदौलिया पर होगी मल्टीलेवल पार्किंग
काशी की हृदयस्थली गोदौलिया पर देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। यहां कूड़ा घर और तांगा स्टैंड पर मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएगी ताकि यहां लगने वाले जाम से मुक्ति मिल सके और सुगम आवागमन हो। इसका निर्माण ऐसी तकनीक से कराए जाने की योजना है जिससे कि अधिक से अधिक वाहनों को खड़ा करने की जगह मिल सके।
करसड़ा प्लांट के संचालन के लिए जल्द टेंडर
करसड़ा कूड़ा प्लांट के संचालन का जिम्मा फिलहाल एनटीपीसी के हाथों में है। एनटीपीसी फंडिंग कर रही है और आईएलएफएस कूड़ा निस्तारण कर रही है। सितंबर में इसका करार खत्म हो रहा है। नगर निगम कूड़ा प्लांट के संचालन के लिए फिर से टेंडर करने जा रहा है। इसमें माना जा रहा है कि पहले कूड़ा उठाने का काम कर रही संस्था ए टू जेड को फिर से शहर की सफाई का जिम्मा दिया जा सकता है। हालांकि ए टू जेड का 2012 में करार टूटने के बाद से विवाद चल रहा है लेकिन अब निगम प्रशासन और संस्था के बीच इस विवाद को भी जल्द सुलझा लिया जाएगा।
एक रंग में होंगे गंगा घाट
अस्सी से राजघाट तक गंगा घाटों को एक रंग में किया जाएगा। अवैध ढंग से की गई पेंटिंग, होर्डिंग्स हटाए जाएंगे। घाटों को उनके मूल स्वरूप में ही इस तरह आकर्षक बनाया जाएगा कि बाहर से आने वाले सैलानियों को और अधिक आकर्षित करें। किस रंग में सारो घाट होंगे, इस पर अभी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।
स्मार्ट सिटी योजना के पहले चरण में चौराहाें, सड़कों, कुंड और तालाब के साथ पार्किंग पर काम होना है। इसकी डीपीआर तैयार कराई जा रही है। इसमें तीन महीने का वक्त लगेगा। इसके बाद बनाई गई योजनाएं धरातल पर दिखने लगेंगी। -डॉ. नितिन बंसल, नगर आयुक्त