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सावित्री त्रिपाठी स्मृति सम्मान कथाकार प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह को

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वाराणसी। सावित्री त्रिपाठी स्मृति सम्मान-2017 इस बार विख्यात कथाकार प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह को दिया जाएगा। शुक्रवार को बीएचयू के हिंदी विभाग सभागार में चर्चित उपन्यासकार प्रो. काशीनाथ सिंह उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे। यह सम्मान ऐसे लेखकों को प्रदान किया जाता है जिनकी रचनात्मकता में बनारस की भूमिका रही हो तथा उत्कृष्ट लेखन में प्रवृत्त हों। अब तक प्रो. चौथीराम यादव, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. देवेंद्र, प्रो. दिनेश कुशवाह और डॉ. अनुज लुगुन को यह सम्मान दिया जा चुका है।
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इस वर्ष सावित्री त्रिपाठी स्मृति सम्मान से नवाजे जाने वाले अब्दुल बिस्मिल्लाह हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार हैं। वह प्रतिबद्ध रचनाधर्मिता के साथ पिछले लगभग चार दशक से साहित्य सृजन में सक्रिय हैं। ग्रामीण जीवन, मुस्लिम समाज के संघर्ष, संवेदनाएं, यातनाएं और अंतरद्वंद्व उनकी रचनाओं का हिस्सा हैं। बनारस की जीवन-संस्कृति पर आधारित उनकी पहली रचना ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया’ काफी चर्चित रही। उन्होंने उपन्यास के साथ ही कहानी, कविता, नाटक जैसी विधाओं के अलावा आलोचना पर भी गाढ़ा काम किया है। उनके चर्चित उपन्यासों में मुखड़ा क्या देखें, समर शेष है, अपवित्र आख्यान शामिल हैं तो अतिथि देवो भव:, रैन-बसेरा, कितने कितने सवाल, टूटा हुआ पंख और जीनिया के फूल कहानी संग्रह भी लोकप्रिय हुए। इलाहाबाद के बलापुर गांव निवासी प्रो अब्दुल बिस्मिल्लाह अब तक कथाक्रम सम्मान, मध्य प्रदेश साहित्य परिषद के अखिल भारतीय देव पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान व हिंदी अकादमी सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
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