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Gyanvapi: 21 साल पहले ज्ञानवापी पर हुए बवाल में BJP नेता समेत 14 आरोपी आरोपमुक्त, 16 लोग थे पाबंद; जानें मामला

Wed, 03 Jun 2026 08:43 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: ज्ञानवापी परिसर में वर्ष 2005 में हुए बवाल के मामले में अदालत ने भाजपा नेता समेत 14 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया। घटना के दौरान छत्ताद्वार पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा जांच के लिए मौलाना बातिन को रोके जाने पर नमाजी उत्तेजित हो गए थे। नारेबाजी के बीच माहौल बिगड़ गया था और तनाव की स्थिति बन गई थी।

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श्री काशी विश्वनाथ धाम के बाहर सुरक्षा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Gyanvapi Case: बहुचर्चित वर्ष 2005 के ज्ञानवापी उपद्रव मामले में लगभग दो दशक तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बुधवार को घटना में आरोपी बनाए गए 14 लोगों एमपी एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम की अदालत ने आरोप मुक्त किया। ये फैसला साक्ष्यों व गवाहों के बयानों का परीक्षण के बाद सुनाया। 

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आरोपमुक्त हुए लोगों में राजेंद्र तिवारी उर्फ बबलू, शंकर गिरी, भानू मिश्रा उर्फ संजीव रतन मिश्रा, अजय चौबे, गुलशन कपूर, जुगनू, मोहम्म्द एजाज, सलीम, इरफान, शेर अली,गुरशेर अली, शमशेर अली, बच्चा मुसलमान उर्फ बच्चा व जब्बार मियां मंसूरी रहे। इस मामले में घटना के दौरान पुलिस ने कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया था।

विवेचना के दौरान 16 लोगों को पांबद किया गया। जिसमें जहांगीर कादरी और शिव सेठ का निधन हो चुका है। विभिन्न न्यायालयों में स्थानांतरण के बाद यह वाद 9 अगस्त 2023 को विचारण के लिए संबंधित न्यायालय को प्राप्त हुआ।

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ये है पूरा मामला
2 सितंबर 2005 को जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग ज्ञानवापी मस्जिद की ओर जा रहे थे, जबकि मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी उसी मार्ग से आवागमन कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत छत्ताद्वार पर तैनात पुलिसकर्मी सभी व्यक्तियों की जांच कर उन्हें प्रवेश दे रहे थे। 

इसी दौरान मौलाना बातिन वहां पहुंचे। सुरक्षा कर्मियों द्वारा उनकी भी तलाशी लिए जाने पर उनके साथ मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और नाराजगी व्यक्त की। आरोप है कि कुछ नमाजी इस घटना से उत्तेजित हो गए और पुलिसकर्मियों से बहस करने लगे। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कुछ लोग वहां से वापस ज्ञानवापी क्रॉसिंग की ओर चले गए, जहां पुलिस और प्रशासन के विरोध में नारेबाजी शुरू हो गई।

मौलाना बातिन एक दुकान पर बैठ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक चौक प्रदीप कुमार वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके अलावा प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी वहां पहुंचे और मौलाना बातिन तथा अन्य लोगों से वार्ता का प्रयास किया। 

इसी दौरान राजेंद्र तिवारी उर्फ बबलू तिवारी का नाम सामने आया। आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अलावा किसी अन्य अधिकारी से कोई बातचीत नहीं की जाएगी तथा मौलाना बातिन को भी बातचीत करने से रोका। रवैये के कारण वहां मौजूद लोगों में उत्तेजना बढ़ी और वार्ता प्रभावित हुई।
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बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई। प्रशासन ने दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद मौलाना बातिन नमाज अदा करने के लिए तैयार हो गए। दोपहर लगभग तीन बजे नमाज शुरू हुई और निर्धारित समय पर संपन्न भी हो गई। 

अभियोजन के अनुसार नमाज समाप्त होने के बाद हालात फिर बिगड़ गए। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग ज्ञानवापी क्रॉसिंग की ओर एकत्रित हो गए और नारेबाजी करते हुए पुलिस पोस्ट तथा वहां लगे उपकरणों को नुकसान पहुंचाने लगे। अभियोजन पक्ष का कहना था कि भीड़ को कई बार चेतावनी दी गई कि उनका जमावड़ा अवैध है और उन्हें वहां से हट जाना चाहिए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

इसके बावजूद भीड़ नहीं मानी और पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। आरोप है कि इस दौरान सरकारी संपत्ति, वाहनों और अन्य सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मंदिर और मस्जिद दोनों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया तथा क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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