वाराणसी। कभी काशी की होली अपना अलग ही अंदाज रखती थी। होली की ठिठोली और इसके रंग यहां के लोगों पर महीने-दो महीने पहले ही चढ़ जाया करते थे। ज्यों-ज्यों होली नजदीक आती हुड़दंग का रंग और चटख होता जाता। कहीं फागुन के गीत गूंजते तो कहीं रचनाकारों की होलियाना कविताएं लोगों का मनोरंजन करतीं। अस्सी और दशाश्वमेध स्थित डेढ़सी के पुल पर होने वाले कवि सम्मेलन तो पूरे शहर का मिजाज ही होलियाना कर देते थे। मगर अब सब कुछ बदल सा गया है। मंगलवार को हमने पिछले चार-पांच दशक में होली के मिजाज और उल्लास में आए बदलावों को समझने के लिए शहर के कुछ साहित्यकारों से बात की तो उन्होंने कुछ इस तरह से अपने अनुभव साझा किए...।
अब होलियाना अंदाज गायब हो रहा
साहित्यकार श्रीप्रकाश शुक्ल बताते हैं कि होली बसंत का राग है और मिलन का उत्सव है। जहां लोग पहले बांस की पिचकारियों से एक-दूसरों को रंगों में सराबोर करते थे। घरों में ठंडई और भाग खिलाई-पिलाई जाती थी। गंगा के घाटों पर कवियों की टोलियां अपनी महफिल सजाती थीं। मगर अब यहां का होलियाना अंदाज धीरे-धीरे गायब हो चला है। होली अब हाई-टेक होकर निशप्राण हो गई है, जो चिंता का विषय है।
यथार्थ जीवन से भी होली के रंग गायब
साहित्यकार डॉ. शशिकला त्रिपाठी की माने तो अब जो बदलाव से बिखराव आ गया, वह केवल रंग ही नहीं ले गया, तन-मन की उमंग, आपसी संबंध और भाईचारा भी छीन ले गया। होली का रंग अब हमारे यथार्थ जीवन से भी लुप्त होता जा रहा है। पहले होली के हफ्ते भर पहले कपड़े खरीदने की तैयारी के साथ महिलाएं अपने घर के आंगन और छतों पर पापड़, चिप्स बनाने में जुट जाती थीं। आज लोगों का रंगों के प्रति आकर्षण भी लुप्त हो गया है।
- मन के उल्लास और उमंग से जुड़ा था होलीकोत्सव-
डॉ. कुमार पंकज का मानना है कि आज लोक परंपरा का उल्लंघन हो रहा है। प्रेम ओर माधुर्य की जगह हुड़दंग ने ले लिया है। आज हर पर्व के साथ दिखावा और औपचारिकताएं जुड़ गई हैं। होली शुरू होने से पहले घर की औरतें इकट्टा होकर गीत, संगीत और नृत्य का कार्यक्रम किया करती थीं। घरों में टेसू के फूलों से प्रकृतिक रंग बनाया जाता था। हांसी ठिठोली हुआ करती थी। गालियां भी ऐसी जिसे सुनकर हंसी आती थी। चौक-चौराहे पर कवि सम्मेलन हुआ करते थे। पहले जहां दिन में लोग एक-दूसरे के साथ रंग खलते थे तो शाम को इत्र लगाकर होली की बधाई देते थे। अब खतरनाक रसायनिक रंगों का डर रहता है। होली में मेल-मिलाप का रंग नदारद है।