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नमोस्तुते मां नमोस्तुते जय जय दुर्गे नमोस्तुते

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वाराणसी। नमोस्तुते मां नमोस्तुते जय जय दुर्गे नमोस्तुते, तेरे नाम की जपे जो माला सारे संकट स्वयं टलें। डा. अमलेश शुक्ल ने जब दुर्गा मंदिर में कन्हैया दूबे का लिखित यह भजन सुनाया तो भक्त मां के जयकारे लगाने लगे। मंगलवार को दुर्गाकुंड स्थित दुर्गामंदिर में वार्षिक संगीतमयी शृंगार महोत्सव हुआ। पांचवीं निशा में एक से बढ़कर एक भजन गाए गये। पूरे मंदिर परिसर को फल, फूल, झालर, मोतियों से सजाया गया था।
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मां कुष्मांडा का गुलाब, अड़हुल, बेला, गुलाब, चम्पा, चमेली, अशोक व कामिनी से शृंगार किया गया। पुजारी पंडित संजय दूबे ने मां की भव्य आरती की। मां के शृंगार झांकी का दर्शन करने के लिये मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। भक्तों को प्रसाद के रूप में खीर और हलुआ वितरित किया गया। लोकगीत व भजन संध्या में लोक गायकों ने मां के चरणों अपनी भावांजलि अर्पित की।
बिहार के गोविंद गोपाल ने गीत गाया कि ले इतनी विनती करूं दुर्गा मइया, अपनी सेवा में मुझको लगाना, लगल भक्त क दरबार मइया के अंगनवा के जरिए दिल जीत लिया। दिल्ली की प्रीति प्रेरणा ने मां तू ही भगवती, मां तू ही कालिका सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। जय कुमार कोविल ने ऊँ कार मंगलम गीत सुनाकर सबको मोहित कर लिया। श्रद्धा पांडेय हो कि भोरवो भोरवो, राजन तिवारी ने माई तोहार गुनवा गवाई सुनाया। महंत पंडित कौशलपति द्विवेदी के आचार्यत्व में कलाकारों का स्वागत किया गया। संचालन रामयश मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन केवल कृष्ण द्विवेदी ने किया। इस मौके पर आनन्द गोपाल द्विवेदी, मोहन दूबे, संजय दूबे आदि मौजूद रहे।
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