वाराणसी। सारनाथ के मवईया में बेसिक सर्विसेज ऑफ अर्बन पूवर (बीएसयूपी) के मकानों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। वर्ष 2010 में बनाए गए इन मकानों में मानकों और गुणवत्ता की अनदेखी हुई है। इसमें 32 मीटर के मकान मानक से ही छोटे बनाए गए हैं। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने इन मकानों की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए हैं और वर्ष 2010 में तैनात अधिकारियों की सूची शासन को भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
शहर उत्तरी विधायक रविंद्र जायसवाल ने जून माह में सारनाथ थाने में डूडा अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। इसमें जिलाधिकारी को जांच के निर्देश मिले थे। जिलाधिकारी ने मवईया सारनाथ स्थित बीएसयूपी योजना के अन्तर्गत बन रहे आवासों का भी निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान लाभार्थी फौजदार से निर्माण सम्बन्धी जानकारी ली। वहीं आस-पास 2010 के स्वीकृत होकर बने आवासों में रह रहे लाभार्थियों भईया लाल, साहबलाल, अनिता पत्नी बब्लू , राजेन्द्र, विजय सहित अन्य ने भी आवास की दीवार में दरार पड़ने, छत चूने, प्लास्टर गिरने आदि की शिकायत सुनी तथा मौके पर शिकायत सही पाये जाने पर उपस्थित अवर अभियन्ता को जमकर फटकार लगायी। उन्होनें उपस्थित परियोजना प्रबन्धक को भी आड़े हाथों लिया और मकानों को गुणवत्ता के साथ बनाने का निर्देश दिया। मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली गली की भी मरम्मत कराने का निर्देश देते हुए दिन में जल रही स्ट्रीट लाईट देखकर निवासियों को जागरूक होने की नसीहत दी। इसके बाद जिलाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने रविवार को सारनाथ स्थित आसरा योजना के अन्तर्गत बन रहे आवासों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ठेकेदार द्वारा प्रयोग की जा रही निर्माण सामग्री के गुणवत्ता के साथ-साथ पीवीसी पाइप, विद्युत तार, पंखे, स्विच इत्यादि को भी देखा।