वाराणसी। तीर्थनगरी काशी में पुत्र कामना के स्नान पर्व सूर्य षष्ठी पर रविवार को लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। रात में ही अनुमान से अधिक इस कदर भीड़ उमड़ी कि भदैनी जाने वाले रास्ते पैक हो गए। बैरीकेडिंग से लेकर बीच सड़कों, गलियों तक श्रद्धालु कहीं लेटे रहे तो रहीं अपनी बारी के इंतजार में बैठकर रात गुजारी। सूनी गोद भरने की आस में शाम पांच बजे तक 3.50 लाख से अधिक दंपतियों ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगाई।
भदैनी स्थित पौराणिक लोलार्क कुंड पर स्नान के लिए इस बार औसत से अधिक भीड़ उमड़ पड़ी। रात 12:10 बजे महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय के अलावा सुट्टू महाराज, कल्लू महाराज और अभिषेक महाराज ने कुंड की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की। इसी के साथ हर हर महादेव के जयकारे के साथ कुंड में स्नान आरंभ हो गया। रात को ही आस्था की कतार सोनारपुरा चौराहे से आगे पहुंच गई थी। बीच सड़क पर लेटी महिलाओं को पुलिस कर्मियों ने कई बार बैरीकेडिंग में कराया। इस दौरान जमकर शोर-शराबा होता रहा। सोनारपुरा, हरिश्चंद्र घाट तिराहे से लेकर अग्रवाल रेडियो तक हजारों महिलाएं सड़कों पर बैठ कर इंतजार की घड़ियां गिनतीं रहीं। भीड़ का दबाव बढ़ने पर पुलिस ने हरिश्चंद्र घाट तिराहे के पास बैरियर लगाकर श्रद्धालुओं को रोकना शुरू कर दिया। इससे कई बार स्थिति असहज हो गई। चिलचिलाती धूप में पानी के बिना श्रद्धालु तड़पते रहे। हालांकि काशी के लोग ट्राली पर बाल्टियों में पानी लेकर भक्तों की प्यास बुझा रहे थे। एक तरफ से श्रद्धालुओं को छोड़ा जाता रहा और स्नान के बाद गोस्वामी तुलसी दास अखाड़ा से होकर श्रद्धालुओं को रानी लक्ष्मीबाई जनमस्थली और द्वारिकाधीश मंदिर के पास से बाहर निकाला जाता रहा। डुमराव बाग कॉलोनी से भी दूसरी कतार अस्सी होते हुए कुंड पर पहुंच रही थी। स्नान करने वाली महिलाओं ने कुंड पर ही कपड़े, शृंगार की वस्तुओं का परित्याग कर दिया। कुंड पर पुराने कपड़ों के ढेर देर रात तक हटाए गए। श्रद्धालुओं ने फलदान किया। लौकी, कइत के सीता फल, कदंब के फलों को पुत्र कामना पूर्ति के लिए कुंड में अर्पित किया।