वाराणसी। सावन के पहले सोमवार को यादव बंधुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया। चंद्रवंशी गोप सेवा समिति की ओर से जलाभिषेक शोभायात्रा गौरी केदारेश्वर महादेव के जलाभिषेक से शुरू हुई। तिलभांडेश्वर, शीतला माता, अहिल्येश्वर, ढुंढीराज गणेश से होते हुए श्री काशी विश्वनाथ, महामृत्युंजय, त्रिलोचन, ऊंकालेश्वर, लाटभैरव के जलाभिषेक से संपन्न हुई। इस दौरान डमरूदल आगे आगे चलते रहे।
सुबह छह बजे गौरी केदारेश्वर से आंखों में सूरमा लगाए गंजी गमछा पहनकर कंधे पर गगरा में गंगा जल लेकर यादव बंधु निकले तो सड़कों की छटा ही बदल गई। लालजी सरदार के नेतृत्व में सैकड़ों यादव बंधु तिलक, चंदन लगाकर बड़े-बड़े कलशों में गंगाजल भरकर ले आए। इस दौरान समूचा इलाका हर-हर बम-बम के उद्घोष से गूंजता रहा। शोभायात्रा में बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी शामिल थे। विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के दौरान दूसरे भक्तों को कुछ देर के लिए रोका गया। यादव बंधुओं ने बाबा से देश के शक्तिशाली और विश्वगुरु बनने की प्रार्थना की। शोभायात्रा में गोपाल यादव, गणेश यादव, पारसनाथ यादव, श्रीकांत यादव, आयुष्मान चंद्रवंशी, विशाल यादव, संतोष यादव, प्रभु यादव, राजू यादव, गोविंद यादव आदि मौजूद रहे।
वहीं, श्रीकृष्ण यादव महासभा के अध्यक्ष प्रकाश यादव और मंत्री मदन यादव के नेतृत्व में केदारघाट से जलाभिषेक यात्रा शुरू हुई जो परंपरागत मार्ग से होकर गोदौलिया होते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची और बाबा का जलाभिषेक किया।
85 साल पुरानी है जलाभिषेक की परंपरा
इस आयोजन के व्यवस्थापक लालजी सरदार ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को बाबा के जलाभिषेक की परंपरा सन् 1932 में उनके पिता स्व. भोला सरदार ने शुरू की थी। उस समय अकाल पड़ा था। लोग भूख से मर रहे थे। तब यादव बंधुओं ने भोले बाबा से बारिश कराने की गुहार लगाई और शिव ने कृपा की बरसात की। तब से निरंतर इस प्रथा का निर्वहन किया जा रहा है।