वाराणसी। परवल के जूस का औषधीय भोग लगने के साथ शनिवार को भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होकर सपरिवार तीन दिन के सैर -सपाटे पर निकल पड़े। शाम को बाजे गाजे के साथ भगवान सुसज्जित डोली पर सवार कराए गए। भक्तों ने डोली उठाई। मंदिर परिसर में उत्सव सरीखा माहौल था। बाजेगाजे, शहनाई की धुनों, भजनों की गूंज के साथ डोली निकलने के साथ ही गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे। इसी के साथ रथयात्रा चौराहे पर भगवान का 14 पहियों वाला रथ सज गया। रविवार की भोर में मंगला आरती के साथ भगवान दर्शन देंगे। इसी के साथ रथयात्रा का मेला गुलजार हो जाएगा।
परवल के जूस का भोग लगने के साथ ही सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा स्वस्थ हो गए। इसके बाद मंदिर के पट खुले और घंटे-घड़ियाल के साथ आरती उतारी गई। बाबा के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शाम चार बजे ढोल, मृदंग के साथ मंदिर परिसर में एक तरफ डोली सजाई जाने लगी, दूसरी ओर विग्रहों का शृंगार शुरू हुआ। डोली दर्शन के लिए उमड़े भक्तों के चलते मंदिर परिसर में तिल रखने की जगह नहीं थी। अस्सी से डोली पर सवार होकर भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ सैर-सपाटे पर शाम को निकले। केशरयुक्त चंदन, इत्र से डोली महमहा रही थी। दुर्गाकुंड, नवाबगंज, कश्मीरीगंज, खोजवां, शंकुलधारा, बैजनत्था होते हुए शाम करीब पांच बजे भगवान की डोली रथयात्रा स्थित बेनीराम के बगीचे में शाम पांच बजे पहुंची। डोली उठाने वाले कहारों के साथ पार्षद गोविंद शर्मा, शापुरी परिवार के सदस्य और पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय मौजूद थे। इससे पहले यूनियन बैंक के सामने रथ की सविधि पूजा की गई। रात करीब 12 बजे के बाद भगवान के विग्रहों को 14 पहियों वाले 20 फीट चौड़े और 18 फीट लंबे रथ पर विराजित कराया गया।
मेला-गरी और काजू की नान खटाई से मेला हुआ गुलजार
रथयात्रा का मेला सज गया। भक्त और भगवान के अनूठे प्रेम का काशी का यह पहला लक्खा मेला है, जो मानसून आने के साथ ही लगता है। भगवान जगन्नाथ के तीन दिवसीय सैर-सपाटे के दौरान बनारस की खास मिठाई नान खटाई की एक से बढ़कर एक बैराइटी का लोग लुत्फ उठाएंगे। महमूरगंज से रथयात्रा -गुरुबाग के बीच करीब दो किमी दायरे में सड़क की दोनों पटरियों पर, गरी, मेवा, काजू, मैदा के अलावा तरह-तरह की नान खटाई की दुकानें सज गई हैं। मेले में तुलसी दल और घी के दीयों की भी डेलिया लेकर बच्चे फेरी लगाने लगे हैं। भगवान को तुलसी ही अर्पित की जाती है।