वाराणसी। साढ़े पांच हजार करोड़ से गंगा में विकसित जल परिवहन सेवा का नियमित संचालन न हो पाने से कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। वाराणसी से हल्दिया तक जलमार्ग पर लोकार्पण के बाद फिर पानी के जहाज नहीं लौटे हैं। आईडब्लूएआई के पास अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की बुकिंग तो आई है पर उसे जलपोत नहीं मिल रहे हैं तो वहीं छोटे उद्यमी जलमार्ग को महंगा सौदा बता रहे। ऐसे में जलमार्ग को परिवहन का चौथा सशक्त माध्यम बनाने के सपने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल रामनगर के राल्हूपुर में ढाई सौ करोड़ की लागत से तैयार मल्टीमोडल टर्मिनल देश को समर्पित किया था। इस दौरान कोलकाता से आए पेप्सिको के 16 कंटेनर को वाराणसी लाया गया था। इसके बाद यहां से इतने ही कंटेनर लेकर जलपोत रवाना हुआ था। इसके बाद से न तो कोई जलपोत वाराणसी आया और न ही यहां से गया। सूत्रों की माने तो जलपरिवहन के लिए कई बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पाद जलमार्ग से भेजने पर सहमति जताई है। जलपोत की कमी के चलते सामानों का आवागमन नहीं हो पा रहा है। आईडब्लूएआई को जलपोत निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश का इंतजार है। वहीं दूसरी ओर वाराणसी व आसपास के उद्यमी जलमार्ग से अपने सामान फिलहाल हल्दिया के रास्ते दूसरे देश नहीं भेज रहे। इसका कारण हल्दिया तक लगने वाला लंबा समय और हल्दिया पोर्ट पर सामान के रख रखाव की उचित व्यवस्था न होना है। गंगा में जलपरिवहन में निरंतरता आने में अभी पांच से छह महीने और लग सकते हैं।