वाराणसी। मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति का विशेष पुण्यकाल 14 जनवरी को रात 8 बजकर 8 मिनट से 15 जनवरी को दिन के 12 बजे तक रहेगा। सूर्य 14 जनवरी को शाम 7:30 बजे के बाद मकर राशि में प्रवेश करेगा।
इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। वीरेंद्र शंकर तिवारी ने बताया कि विक्त्रस्म संवत् 2074 में संक्त्रसंति का वाहन महिष और उप वाहन ऊंट रहेगा। इस साल संक्रांति काले वस्त्र व मृगचर्म की कंचुकी धारण किए, नीले आक के फूलों की माला पहने, नीलमणि के आभूषण धारण किए, हाथ में तोमर आयुध लिए, दही का भक्षण करती हुई दक्षिण दिशा की ओर जाएगी।
शास्त्रों की मानें तो दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक और उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक कार्यों का खास महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर फिर मिल जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शुद्ध घी और कंबल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। इस दिन खिचड़ी का भी विशेष महत्व रहता है।