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...तो जांच रुकवाने में जुट गए हैं प्रभावशाली लोग

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वाराणसी। भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए एआरटीओ आरएस यादव से जुड़े मामलों की जांच ढीली पड़ गई है। इससे न सिर्फ जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि नई सरकार में आरएस सिंडिकेट को सत्ता के गलियारे में संरक्षण के संकेत दिए जाने की बातें भी चर्चा में है। सूत्रों की मानेें तो आरएस यादव के करीबी सत्ता से जुड़े कुछ बड़े नेताओं और नौकरशाहों के संपर्क में हैं। सूत्रों की मानें तो अरबों की संपत्ति की निष्पक्षता से जांच होने पर कई और चेहरों के बेनकाब होने की आशंका से शासन के कुछ नेता और अधिकारी मामले को दबाने की कोशिश में हैं।
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मामला सामने आने पर सीएम योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद शुरुआत में जो पैरोकार पीछे हट गए थे, अब उन्हीं के जरिए मामले को ‘मैनेज’ कराया जा रहा है। ईडी जांच की बात तो दूर, पुलिस की जांच में भी ठहराव आ गया है। अरबों की संपत्ति के खुलासे के बावजूद विजलेंस ने भी छापेमारी नहीं की है। विजिलेंस के एसपी शिव शंकर सिंह ने जांच के संदर्भ में एसपी चंदौली संतोष सिंह से मुलाकात कर ब्यौरा भी लिया था।
दरअसल, आरएस यादव के साम्राज्य में बड़े कारोबारियों से लेकर नेताओं और अधिकारियों का भी काला धन लगे होने की बात पुलिस की छानबीन में सामने आ चुकी है। पता चला है कि सबने मिलकर कई बोगस कंपनियां भी बनाई हैं। पुलिस के पास कंपनियों के कागजात भी हैं लेकिन उसने अब तक कंपनी के किसी भी साझेदार से पूछताछ नहीं की। कई प्लाट और अन्य संपत्तियों का भी खुलासा हो चुका है लेकिन पुलिस अब तक आरएस यादव के चालक का भी पता नहीं लगा पाई है। चालक महेंद्र के नाम छावनी क्षेत्र स्थित करोड़ों का होटल है। उसे आरएस का सबसे बड़ा राजदार माना जा रहा है। दबिश और नोटिस के बाद भी पुलिस न तो उसे गिरफ्तार कर पाई है, न ही उसके खिलाफ मुकदमा कायम किया गया है।
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