वाराणसी। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त देश का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए मरीजों की तलाश कर उन्हें बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर अभियान भी चलाया जा रहा है। बावजूद इसके साल दर साल टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस साल अब तक तीन महीने में 1571 मरीजों की तलाश की जा चुकी है। इसके पहले वर्ष 2017 में 5032 और 2018 में 7762 मरीज देखे गए।
हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व क्षय रोग दिवस का थीम ‘इट्स टाइम’ यानि ‘यह समय है’, निर्धारित किया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि देश, प्रदेश एवं जिला स्तर पर टीबी से निपटने के लिए पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत हर मरीज के घर के नजदीक एक डाट्स सेंटर बनाया गया है, ताकि मरीज को दवा खाने में कोई परेशानी न आए। इसके साथ ही सक्रिय टीबी खोज अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें घर-घर जाकर टीबी के छुपे मरीजों को खोजा जा रहा है और इलाज कर उनको ठीक किया जा रहा है।
जिला क्षयरोग केंद्र के मुताबिक वर्ष 2017 से 18 मार्च 2019 तक 3,652 टीबी के मरीजों का इलाज पूरा किया गया। इसके साथ ही 1,685 का इलाज पूरा करते हुए ठीक किया जा चुका है। इसके अलावा निक्षय पोषण मिशन योजना के तहत टीबी के मरीजों को पोषाहार का सेवन करने हेतु आर्थिक राशि 500 रुपये सीधे उनके खातों में पहुंचाई जा रही है। जिले में 2017 में 101 टीबी के मरीजों को 500 रुपये दिए गए। वहीं 2018 में 4,536 और 2019 में 280 टीबी के मरीजों को 500 रुपये दिए गए।