वाराणसी। सुबह ए बनारस की होली नहीं देखी तो क्या देखी। घाट और गलियों में हुरियारों की टोली जब निकलती है तो जोगीरा की धुन सुनकर हर कोई झूम उठता है। काशी में होली उल्लास हंसी, ठिठोली का पर्व बाबा विश्वनाथ को गुलाल चढ़ाने के साथ शुरू हो जाती है। सत्य, शांति, प्रेम, दृढ़ता, विजय की याद दिलाने वाले पर्व होली की रंगत हर किसी के चेहरे पर नजर आती है। रंग-भंग और गारी वाली काशी की अड़भंगी होली का खुमार रंगभरी एकादशी से शुरू होकर बुढ़वा मंगल तक चलता है।
गीतकार कन्हैया दूबे केडी कहते हैं कि जोगीरा सारा रा रा... लालू के लगा के ललका, मुलायम के हरियरका, स्मृति रानी के पियर, प्रियंका के बोला के नीयर जोगीरा सारारारा...। होली का पवित्र त्योहार असत्य पर सत्य की जीत का त्योहार है। इस पर्व पर भक्त प्रह्लाद जैसी दृढ़ ईश्वर निष्ठा, प्रभु प्रेम, सहनशीलता व समता का आह्वान करना चाहिए। हिरण्यकश्यप रूपी आसुरीवृत्ति तथा होलिका रूपी कपट की पराजय का दिन है होली। यह पवित्र पर्व परमात्मा में दृढ़ निष्ठावान के आगे प्रकृति द्वारा अपने नियमों को बदल देने की याद दिलाता है। मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह विघभन बाधाओं के बीच भी भगवदनिष्ठा रखकर संसार के भवसागर से पार होने का पर्व है होली।
कन्हैया कहते हैं कि काशी में तो महादेव के बिना हर पर्व अधूरा है और जब बात होली की हो तो चिता भस्म को अंग लपेटे खेलें भोला होली रे..., राधा कृष्ण के प्रेम और मनुहार को दर्शाती कान्हा राधा करें बर जोरी, होली आई रे क न्हाई...जैसे गीत बरबस ही जबान पर आ जाते हैं। वह आगे गाते हैं कि काशी में फगुआ मना रहे हो गौरा के दूल्हा... भी बहुत लोकप्रिय गीत है।