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3.5 किलो सोने के बिस्किट के साथ लापता सर्राफ गिरफ्तार

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वाराणसी। भेलूपुर थाना अंतर्गत विनायका कमच्छा निवासी आभूषण कारोबारी राजेश कुमार गुप्ता के रहस्यमय तरीके से लापता होने की गुत्थी पुलिस ने एक हफ्ते बाद गुरुवार को सुलझा दी। पुलिस ने खोजवां में पैदल जा रहे राजेश की कमर में बंधे कपड़े से साढ़े तीन किलो वजन के सोने के बिस्किट और हैंडबैग से 21 लाख रुपये बरामद किए। दोनों के संबंध में वह कोई कागजात नहीं पेश कर सका तो पुलिस ने उसे और साथ मौजूद उसके करीबी प्रतापगढ़ के चौक थाना के शंकर दयाल रोड निवासी शुभम खंडेलवाल को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस के अनुसार राजेश अवैध तरीके से होने वाली सोने की खरीद-फरोख्त के धंधे में बिचौलिए का काम करता था। इसी दौरान राजेश पर 20 से 25 लोगों के करीब छह करोड़ रुपये बकाया हो गए थे। बकाएदारों के तगादे से आजिज आकर वह घर छोड़ कर भाग गया था। बरामद सोने के संबंध में वाणिज्य कर विभाग को भी पुलिस ने जानकारी दी है।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि 14 दिसंबर को रीना गुप्ता ने तहरीर दी थी कि उनके पति राजेश गुप्ता दिल्ली जाते समय कहीं खो गए हैं। इलाहाबाद के बाद से उनका मोबाइल स्विच ऑफ है। मामले की तफ्तीश में भेलूपुर इंस्पेक्टर अशेषनाथ सिंह और उनकी टीम लगी। गुरुवार सुबह मुखबिर से सूचना मिली कि राजेश सुंदरपुर चौराहे की ओर से खोजवां की तरफ पैदल ही जा रहा है। इस सूचना पर इंस्पेक्टर भेलूपुर मौके पर पहुंचे और राजेश व शुभम को पकड़कर थाने ले आए।
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राजेश से पूछताछ शुरू हुई तो उसने बताया कि बरामद सोना और रुपया उसे कोलकाता स्थित एक फर्म के कर्मचारी नीतेश ने लाकर दिया था। इसे दिल्ली स्थित एक फर्म को पहुंचाना था लेकिन उसने कुछ रुपये खर्च कर दिए थे। बताया कि वह कोलकाता से सोना लाकर वाराणसी और नई दिल्ली के स्वर्णकारों को देता है। इसी बीच आधी-अधूरी सप्लाई और पूरी कीमत वसूलने के कारण उस पर छह करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। रोजाना के तगादे से वह आजिज आकर पत्नी को बगैर बताए ही वह लापता हो गया। सोचा था कि वापस लौटेगा तो सोने और रुपये लूटे जाने की बात पुलिस और कोलकाता स्थित फर्म को बता देगा मगर इससे पहले ही पकड़ा गया। उधर, एसएसपी ने इंस्पेक्टर भेलूपुर और उनकी टीम को पांच हजार के पुरस्कार की घोषणा की है।
किसी बकायेदार ने नहीं दी तहरीर
एसपी सिटी ने बताया कि राजेश के लापता होने को लेकर शुरू से ही उसके बकायेदारोें को संशय था। उन्हीं से पूछताछ में राजेश के असली कामकाज का पता चला। वह सराफा दुकान की आड़ में बड़े व्यापारियों को सोने की सप्लाई करता था। तहरीर मांगी गई तो कोई बकायेदार आगे नहीं आया। इसका सीधा सा मतलब है कि जिन लोगों का बकाया है वो भी अवैध तरीके से होने वाली सोने की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं।
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