वाराणसी। जिस समाज में चरित्र, मर्यादा के प्रति लगाव होता है, वही समाज जीवित रहता है। आज देश को संस्कार की आवश्यकता है। छात्र-युवाओं को चाहिए कि वे जीवन में कभी निराश न हों। दृढ़ संकल्प करें, नेक इंसान बनें। ये बातें जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहीं। वह रविवार को उदय प्रताप कॉलेज के राजर्षि सभागार में आयोजित राजर्षि जयंती को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि छात्रों को याद रखना होगा कि गुरुओं के संस्कार से ही चरित्र निर्माण होगा। आज समाज में मर्यादा का अभाव होता जा रहा है। व्यक्ति तब माननीय हो जाता है जब उसका चरित्र माननीय हो जाता है। शिक्षा जगत में राजर्षि ऐसे ही आदर्श चरित्र के रूप में जाने जाते हैं। उनके मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं। राजर्षि की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। रानी मुरार कुमारी बालिका विद्यालय की कुमारी जिज्ञासा एवं छवि की टोली ने कुलगीत एवं सरस्वती वंदना पेश की। सौरभ राय ने मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का विधिवत आगाज किया। आशुतोष मिश्रा, आयुषी चैहान, सौरभ राय, नेहा सिंह, रतन सिंह एवं साक्षी द्विवेदी ने पूज्य राजर्षि को भावांजलि प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि ने अर्जुन पुरस्कार से पुरस्कृत प्रशांति सिंह को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उदय प्रताप शिक्षा समिति के सचिव यू एस सिन्हा, एआर खान ने विद्यालय की प्रगति और भावी योजनाओं की रूपरेखा पेश की। मुख्य अतिथि को समिति के उपाध्यक्ष प्रो. कीर्ति सिंह, सचिव यू एन सिन्हा एवं सयुक्त सचिव केपी सिंह ने स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया ।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत उदय प्रताप पब्लिक स्कूल ने गणेश वंदना के माध्यम से मनोहारी भावनृत्य प्रस्तुत किया। रानी मुरार कुमारी बालिका विद्यालय ने महिषासुर वध के द्वारा आदिशक्ति मॉ दुर्गा के नौ रूपों की भव्य प्रस्तुति दी। अध्यक्षता शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष प्रो. कीर्ति सिंह, स्वागत कृष्णपाल सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस.एन सिंह ने किया। संचालन डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने किया। उदय प्रताप शिक्षा समिति के न्यायमूर्ति डीपी सिंह, प्रो. यूएस सिन्हा, ए. आर. खान, एमएलसी चेतनारायण सिंह, प्रो. धर्मवीर सिंह, प्रधानाचार्य डा. रमेश प्रताप सिंह, प्रधानाचार्या आभा सिंह, संगीता कुमार, डा. देवेन्द्र कुमार सिंह, डा. मनीष कुमार सिंह आदि मौजूद थे।