वाराणसी। संतान की कामना के लिए देश-विदेश के हजारों दंपती लोलार्क षष्ठी स्नान के लिए काशी आएंगे। अस्सी के भदैनी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर 26 अगस्त को आस्था का यह मेला गुलजार होगा। काशी के लक्खा मेलों में शुमार लोलार्क षष्ठी स्नान की तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही है। प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग और सुरक्षा के अन्य इंतजामों के साथ ही निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए गए हैं। सड़कों की मरम्मत के साथ ही पेयजल, बिजली सहित अन्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं। 25 अगस्त की मध्य रात्रि 12:30 बजे लोलार्क कुंड पर पूजन होगा और फिर सूर्योदय के दो घंटे पहले से स्नान शुरू हो जाएगा।
कुंड की साफ-सफाई के साथ ही वहां के प्रवेश और निकासी के रास्ते पर बैरिकेडिंग के साथ ही अन्य तैयारियां की जा रही हैं। कुंड के आसपास की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। इसके अलावा साफ-सफाई की भी बदहाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल्द से जल्द सड़क और सफाई दुरुस्त कराई जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न होने पाए। इस बीच, प्रशासन की ओर से कुंड तक जाने वाले रास्तों की मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम को साफ-सफाई और प्रकाश की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के अलावा देश के कोने-कोने से हजारों दंपती स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं। 25 अगस्त की रात से ही दंपतियों का जमावड़ा यहां शुरू हो जाएगा। भीड़ इतनी जबरदस्त होती है कि उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। पिछले वर्षों में यहां भगदड़ जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसके मद्देनजर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के साथ ही ट्रैफिक डायवर्जन की भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
मान्यता के पीछे यह कहानी
लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित कूच विहार स्टेट के एक राजा चर्मरोग से पीड़ित और नि:संतान थे। यहां स्नान करने से न केवल उनका चर्मरोग ठीक हुआ बल्कि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने इस कुंड का निर्माण सोने की ईंट से कराया था। आदर्श सेवा संस्कृत विद्यालय ईश्वरगंगी के प्रधानाचार्य पंडित उमाशंकर चतुर्वेदी कंचन बताते हैं कि लोलार्क कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी वाले दिन कुंड से लगे कूप से पानी आता है। सूर्य की रश्मियों के पानी में पड़ने से संतान उत्पत्ति का योग बनता है। इस दौरान महिलाओं के स्नान करने से वे संतान प्राप्त करती हैं। इसके अलावा संतान की रक्षा के लिए भी महिलाएं स्नान करती हैं। वहीं, संन्यासी मोक्ष के लिए स्नान करते हैं। दंपती स्नान के बाद कुंड पर ही कपड़े छोड़ देते हैं। छाया, टोना, टोटका आदि का निवारण भी होता है। एक फल त्यागने का भी विधान है।
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भोर से सूर्यास्त तक होगा स्नान
26 अगस्त को लोलार्क कुंड पर स्नान की शुरुआत सूर्योदय के दो घंटे पहले हो जाएगी, जो सूर्यास्त तक चलेगी। लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि सूर्योदय के दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त तक स्नान का विधान है। 25 अगस्त की रात 12:30 बजे कुंड पर पूजन होगा। इसके बाद भोर से स्नान पर्व शुरू हो जाएगा जो सूर्यास्त तक चलेगा। मान्यतानुसार संतान के लिए यहां स्नान करने वाले दंपती की मनोकामना जरूर पूरी होती है। स्नान के बाद दंपती कुंड पर ही कपड़े और जूता-चप्पल छोड़ देते हैं। कुंड में कोई न कोई एक फल भी छोड़ा जाता है। सूर्योपासना के इस महापर्व पर वे दंपती भी आते हैं जिनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। वे अपनी संतान के साथ यहां आते हैं और मुंडन कराते हैं।
सात डिप्टी एसपी और 11 थानाध्यक्ष संभालेंगे सुरक्षा की कमान
वाराणसी। लोलार्क षष्ठी के मद्देनजर बुधवार को एसएसपी आरके भारद्वाज भदैनी स्थित लोलार्क कुंड पहुंचे। इस दौरान एसएसपी ने श्रद्धालुओं के प्रवेश-निकास के रास्ते और भीड़ नियंत्रित करने के उपाय के बारे में जानकारी ली। एसएसपी ने बताया कि कुंड में एनडीआरएफ के जवान तैनात रहेंगे। इसके साथ ही गंगा में भी एनडीआरएफ, पीएसी बाढ़ राहत दल और जल पुलिस के जवानों को तैनात किया जाएगा। लोलार्क कुंड आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सात डिप्टी एसपी, 11 थानाध्यक्ष, 34 सब इंस्पेक्टर, 16 महिला सब इंस्पेक्टर, 70 हेड कांस्टेबल, 400 कांस्टेबल, 96 महिला कांस्टेबल, फायर बिग्रेड की दो गाड़ियां और एक कंपनी पीएसी के जवान तैनात रहेंगे।