फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारगाहे इलाही में मिल्लत के लिए उठे हाथ

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। लकदक लिबास, इत्र की खुशबू और चेहरे पर नूरानी रंग...। रमजान के आखिरी जुमा पर कुछ ऐसी ही रंगत देखने को मिली। जिधर देखो उधर लोग मस्जिदों की ओर रुख करते नजर आए। शुक्त्रस्वार को अलविदा जुमा की नमाज अदा कर लोगों ने अपने पाक परवरदिगार से अमन और मिल्लत की दुआ के लिए बारगाहे इलाही में हाथ उठाए तो उनकी आंखें नम थीं। इस गम में कि अब ये पाक और मुकद्दस रमजान उनसे विदा होने वाला है।
विज्ञापन

अलविदा जुमा के दिन हर मस्जिद नमाजियों से भरी थी। कई मस्जिदों में तो नमाजियों के जोश के आगे जगह तक कम पड़ गई। ऐसे में लबे सड़क लोगों ने नमाज अदा की। नई सड़क, दालमंडी, नदेसर में ऐसा ही नजारा रहा। नमाज से पहले मस्जिदों में तकरीर और खुतबा भी हुआ।
मुफ्ती-ए-शहर मौलाना बातिन ने मस्जिद अबू हनीफा में नमाज अदा कराई। तकरीर में उन्होंने कहा कि रमजान भले ही हमसे रुखसत होने वाला है लेकिन जितने दिन बचे हैं, इबादत में गुजारें। रमजान का एक-एक लम्हा कीमती है। इसी तरह लंगड़ा हाफिज मस्जिद में मौलाना जकीउल्लाह कादरी ने कहा कि रमजान में खर्च करने वालों को अल्लाह दोगुना देता है। उधर, ज्ञानवापी मस्जिद में मौलाना आखिर नोमानी ने अलविदा जुमा की नमाज अदा कराई।
विज्ञापन

शिवपुर, पुलिस लाइन, कचहरी, लाट सरैया, नई सड़क, बजरडीहा, शिवाला, पीलीकोठी, बड़ी बाजार, लल्लापुरा, मदनपुरा आदि इलाकों में लोग दो रेकअत नमाज अदा करने के लिए अपने रब की बारगाह में हाजिर थे। उलेमा इकराम ने बताया कि अलविदा जुमे की फजीलत वैसे ही है जैसे सितारों के झुरमुट में चांद की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें