वाराणसी। बनारस कचहरी का ऐतिहासिक लाल भवन...। 113 साल से न्याय की आवाज का गवाह और स्वतंत्रता संग्राम की यादों को संजोए बनारस कचहरी का ये भवन जल्द ही नए वैभव के साथ सामने होगा। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से इसके जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण का काम पुरातत्व विभाग की निगरानी में चल रहा है।
इस लाल भवन का जीर्णोद्धार कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) की ओर से कराया जा रहा है। बनारस बार के पूर्व प्रबंध समिति सदस्य मिलिंद श्रीवास्तव कहते हैं कि सुंदरीकरण कार्य का परिणाम अब दिखने लगा है। लघुवाद न्यायाधीश के अदालत कक्ष की चमक और साज-सज्जा बदलने लगी हैं। कक्ष किसी सेवन स्टार होटल के शानदार कमरे जैसा दिख रहा है। लाल भवन के इतिहास का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि अगस्त क्रांति के दौरान 1942 में भवन पर लगे यूनियन जैक को हटाकर भारतीय तिरंगा फहराया गया था। जनसंघ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय समेत बहुचर्चित मामलों की सुनवाई इसी भवन में हुई। धानापुर कांड जिसे बनारस का चौरी चौरा कांड कहा जाता है उसकी सुनवाई हुई थी। राजनारायण के नेतृत्व में 1942 तिरंगा फहराया गया।
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1913 साल बाद भी यहां की सीढि़यों पर नहीं लगी जंग
बनारस बार के पूर्व महामंत्री अधिवक्ता नित्यानंद राय के अनुसार कचहरी का मुख्य भवन ही लाल भवन के नाम से प्रसिद्ध है। वर्ष 1913 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। इसके बाद यहां न्यायिक कार्य शुरू हुआ। भवन वास्तुकला बाइजेंटाइन (पूर्वी रोमन) पर आधारित है। ईंट और पत्थरों से तैयार यह भवन स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है। अदालत कक्षों में प्राकृतिक हवा और रोशनी पहुंचती रहे, इसके लिए डिजाइन को उसी अनुरूप तैयार किया गया था। लाल भवन की दूसरी मंजिल पर जाने के लिए बनी सीढि़यों पर 113 साल बाद भी जंग नहीं लगी है।
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अलीगढ़ में भी इसी शैली की बनी है अदालत
लाल भवन की स्थापत्य शैली को अपने आप में अनूठा माना जाता है। अंग्रेजी शासनकाल में इसी तरह की वास्तुशैली पर बनारस और अलीगढ़ में न्यायालय भवनों का निर्माण कराया गया था। लाल भवन के निर्माण के सौ वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2012 में इसके जीर्णोद्धार की मांग उठी थी। तत्कालीन बनारस बार के पूर्व महामंत्री श्रीनिवास मिश्र ने भवन के सौ वर्ष पूरे होने पर भव्य आयोजन कराया था। 2016 में नित्यानंद राय ने अधिवक्ताओं के सहयोग से चंदा जुटाकर ऐतिहासिक लाइब्रेरी की मरम्मत कराई गई थी।
ये है बाइजेंटाइन आर्ट शैली
बाइजेंटाइन आर्ट शैली मध्ययुगीन पूर्वी रोमन (बाइजेंटाइन) साम्राज्य की एक प्रमुख कला शैली है जो मुख्य रूप से मणिकुट्टिम (मोजेक), धार्मिक प्रतीकों (आइकन) और भव्य गुंबददार वास्तुकला के लिए जानी जाती है। यह शैली चौथी शताब्दी से लेकर 1453 ईस्वी तक प्रसिद्ध रही।
लाल भवन की खासियत
- 1913 में बनकर तैयार हुआ था
- बाइजेंटाइन आर्ट शैली पर आधारित वास्तुकला
- ईंट और पत्थरों से हुआ निर्माण
- अदालत कक्षों में प्राकृतिक रोशनी और हवा की व्यवस्था
- लोहे की घुमावदार सीढ़ियां आज भी आकर्षण का केंद्र
- करीब ढाई करोड़ रुपये से चल रहा जीर्णोद्धार