वाराणसी। दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराना और बयान के दौरान उससे मुकर जाना एक महिला को महंगा पड़ गया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचम विश्वजीत सिंह की अदालत ने साजिश के तहत दुराचार का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की बड़ागांव पुलिस की रिपोर्ट स्वीकार कर महिला के खिलाफ साजिश के तहत झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है और अगली तारीख चार अप्रैल तय की है।
प्रकरण के अनुसार बड़ागांव थाना के हरहुआडीह की अंतिमा मिश्रा से पड़ोस में रहने वाले राघवेंद्र मिश्रा उर्फ सोनू ने रुपये उधार लिए थे। रुपये वापस न मिलने पर अंतिमा मिश्रा ने राघवेंद्र मिश्रा व उसके दोस्त अभिषेक मिश्रा पर नशीला पदार्थ युक्त कोल्डड्रिंक पिलाकर दुष्कर्म करने और उसकी वीडियो क्लिप बनाकर उससे 4,45,000 रुपये ऐंठने का आरोप लगाया। साथ ही, इस संबंध में 10 सितंबर 2015 को एसएसपी के यहां प्रार्थना पत्र दिया। एसएसपी के आदेश पर दोनों के खिलाफ दुराचार समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में जब महिला ने अदालत के समक्ष कलम बंद बयान दर्ज कराया तो वो अपने आरोप से मुकर गई। इस पर पुलिस ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगते हुए महिला के खिलाफ साजिश के तहत गलत आरोप लगाने के मामले में मुकदमा दर्ज करने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया।