वाराणसी। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने कहा कि नीम हमारी संस्कृति से जुड़ा है। इसके औषधीय गुण मनुष्य ही नहीं, फसलों के लिए भी सुरक्षा कवच हैं। नीम किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है। सरकार को चाहिए कि इस पेड़ को राज्य वृक्ष घोषित करने के साथ ही पौधरोपण अभियान में नीम को प्राथमिकता दे। ये बातें उन्होंने गांधी अध्ययन पीठ में आयोजित नीम संगोष्ठी में कहीं।
ग्लोबल नीम आर्गेनाइजेशन, काशी विद्यापीठ और नाविक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी में नीम हकीम के नाम से मशहूर बांग्लादेश के डॉ. एमए हकीम ने कहा कि नीम में बीमारियों से ही नहीं, ग्लोबल वार्मिंग से भी लड़ने की ताकत है। इसी आधार पर डब्ल्यूएचओ ने नीम को इक्कीसवीं सदी का पेड़ घोषित किया है। उन्होंने बताया कि पुणे में नीम से कैंसर और मधुमेह की दवा तैयार कर की गई है। भारत के नाम इसका पेटेंट भी होने जा रहा है।
भारत सरकार के पूर्व सचिव डॉ. कमल टावरी ने कहा कि नीम की मार्केटिंग करनी होगी। नीम पर उत्कृष्ट रिसर्च करने वाले को प्रोत्साहित किया जाए। नाबार्ड मुंबई से सेवानिवृत्त आरएएस खंगार ने कहा कि पहले भारत नीम के उत्पादों के लिए विदेशों को कच्चा माल उपलब्ध कराता था, लेकिन अब आस्ट्रेलिया और चीन इस क्षेत्र में भारत को चुनौती दे रहे हैं। हमें व्यापार के नजरिये से वृहद स्तर पर इसका पौधरोपण करना होगा। अध्यक्षता कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने की। इस अवसर पर डॉ. एमए हकीम को ग्लोबल नीम रत्न सम्मान, इफ्को के प्रबंध निदेशक डॉ. यूएस अवस्थी को राष्ट्रीय नीम रत्न और मनोज सिंह को उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान से नवाजा गया। स्वागत डॉ. वीके सिंह ने किया। कार्यक्रम में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एके सिंह, एसके सिंह, शिवेंद्र कुमार सिंह, डॉ. एसबी सिंह, डॉ. अखिलेश सिंह और एमी वी मार्ला आदि मौजूद रहे।