फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारती तीर्थ ने स्वरूपानंद को माना ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य भारती तीर्थ ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ही मान्यता दी है। उनका कहना है कि वह स्वरूपानंद को ही ज्योतिष्पीठ के आचार्य के रूप में मानते आए हैं। ऐसे में इस पीठ पर नए शंकराचार्य के चयन को लेकर अभिमत देना उनके लिए धर्म संकट की स्थिति है।
विज्ञापन

शंकराचार्य चयन प्रक्रिया को लेकर यह मत उन्होंने भारत धर्म महामंडल के जनरल सेक्रेटरी शंभूनाथ उपाध्याय और रेजीडेंट सेक्रेटरी राजेश राय से हुई वार्ता के दौरान व्यक्त किया। महामंडल के दोनों पदाधिकारी हाल में ही उनका अभिमत प्राप्त करने के लिए शृंगेरी गए थे।
शृंगेरी पहुंचे प्रो. शंभूनाथ ने शंकराचार्य भारती तीर्थ से मुलाकात कर उनसे ज्योतिष्पीठ पर हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई चयन प्रक्रिया की जानकारी दी। इस पर शृंगेरी के शंकराचार्य ने कहा कि वह ज्योतिष्पीठ पर 1973 से लेकर अब तक स्वामी स्वरूपानंद को ही शंकराचार्य मानते आ रहे हैं। ऐसे में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद नहीं हैं, वह नहीं कह सकते।
विज्ञापन

प्रो. शंभू का कहना था कि वह हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कराना चाहते हैं ताकि प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस पर शंकराचार्य का कहना था कि यह महामंडल की अपनी समस्या है, उनकी नहीं। उन्होंने शृंगेरी में हुए कई ऐसे आयोजनों की नजीर भी दी, जिसमें ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में स्वरूपानंद दी महाराज को ही बुलाया गया था। प्रो. शंभूनाथ उपाध्याय ने बताया कि शृंगेरी के शंकराचार्य ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपना लिखित अभिमत संन्यासी का नाम नामित करते हुए भेजने का भी भरोसा दिलाया है। शंकराचार्य चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए हाईकोर्ट की ओर से निर्धारित तीन महीने का समय बीतने के सवाल पर जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि तीन महीने का समय बढ़ाने के लिए आवेदन दिया जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें