कलावती ने बताया कि सुबह ठीक पांच बजे उठ जाती हूं। घर के ही बगल के मैदान में दौड़ने जाती हूं। वापस आकर नहा-धोकर ठीक सात बजे चाय पीती हूं। इसके बाद फल के साथ हल्का नाश्ता करती हूं। पूर्वाह्न 11 बजे से पहले भोजन ले लेती हूं। दिन में दो बार ध्यान करती हूं। इसके बाद शाम को हल्का नाश्ता, फिर शाम 7.30 बजे रात का भोजन करती हूं। इसके बाद टहलती हूं और नौ बजे तक सो जाती हूं।
कलावती ने बताया कि बचपन से खेलने का शौक था। मेरे तीनों भाई पहलवान थे। उनके साथ खेलती थी। जैसे जैसे उम्र हुई्, शरीर पर ध्यान देती गई। उम्र से इस पड़ाव पर मेरे भतीजे ने मुझे सांसद स्पर्धा के बारे में बताया और इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। फिर मन में आया कि जीत हार अपनी जगह है। इक बार हिस्सा लेना चाहिए।
पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खेल में हिस्सा लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवा जितना समय मोबाइल में दे रहे हैं, बेहतर हो कि उतना समय वह खेल में दें। इससे न सिर्फ उनका भविष्य संवरेगा, बीमारियों से भी दूर रहेंगे।