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महात्मा गांधी ने देखा था समग्र विकास का सपना

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वाराणसी। बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र में महात्मा गांधी के 150वें जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में महात्मा गांधी के जीवन दर्शन की चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रो. रमेश सी भारद्वाज ने कहा कि महात्मा गांधी जीवन का समग्र विकास चाहते थे। उन्होंने यही सपना देखा था। वह भारतीय आवश्यकता के अनुसार स्नातक तैयार करना चाहते थे, जो ग्रामीण अंचलों में सेवा कर सके।
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‘भारतीय ज्ञानपरम्परा के पुरस्कर्ता महात्मा गाँधी’ विषयक व्याख्यान में प्रो. भारद्वाज ने कहा कि पिछले वर्षों में सच्चे गांधी का स्वरूप सही ढंग से उकेरा नहीं जा सका है। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने कहा कि गांधीवाद का हीरा नैतिकता है। गांधी एक सांस्कृतिक युगबोध हैं। गांधी के सपनों के भारत पर बोलते हुए कहा कि गांधी समाज के अंतिम व्यक्ति के बारे में सोचते हैं। यह पृष्ठभूमि उन्हें भारतीय चिन्तन परम्परा से मिलती है। अतिथियों का स्वागत समन्वयक प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनूपपति तिवारी और संचालन डॉ. सिद्धिदात्री भारद्वाज ने किया। इस दौरान प्रो. सोमनाथ नेने, प्रो. श्याम कार्तिक, प्रो. उपेंद्र पांडेय, डॉ. प्रदीप सोनकर आदि मौजूद रहे।
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