रबीश श्रीवास्तव
वाराणसी। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में ऑक्सीजन की पाइप लाइन के बीच इस्तेमाल की जा रही बाइब्रेशन मशीन से ऑक्सीजन गैस की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। दरअसल, अस्पताल में अंडर ग्राउंड मशीनें लगाई जानी हैं। जहां मशीनें लगाई जानी हैं, इसी के पास से ऑक्सीजन गैस पाइप लाइन के साथ ही सीवर की मेन लाइन भी जा रही है।
इसका खुलासा विश्वविद्यालय निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता के एक पत्र से हुआ है। कुलसचिव, आईएमएस के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक को भेजे गए पत्र में अधीक्षण अभियंता ने निर्माण कार्य में मानकों को नजरअंदाज करने के साथ ही इंजीनियर की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। सूत्रों के मुताबिक सलाहकर की नियुक्ति, कराए जाने वाले कार्यों के बारे में विभाग को जानकारी नहीं दी गई है।
अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में अलग-अलग निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। अस्पताल में इस काम को देखने के लिए एक सेवानिवृत्त इंजीनियर को तकनीकी सलाहकार बनाया गया है। सलाहकार की ओर से कराए जाने वाले कार्यों और उसकी अनुमानित लागत का विवरण, जगह का चयन सहित अन्य बिंदुओं की जानकारी निर्माण विभाग को भेजने की जानकारी मिलने पर अधिकारी हैरान रह गए।
अधीक्षण अभियंता के पत्र में कहा गया है कि बाइब्रेशन मशीनें लगाने की सूचना उनके पास नहीं है। पत्र में बाइब्रेशन मशीन लगाने, इसके फाउंडेशन के लिए 40 सेमी तक जमीन खोदकर उस पर 23 सेमी की पक्की दीवार बनाने का जिक्र करते हुए लिखा कि इससे गैस पाइप लाइन के साथ ही सीवर पाइप लाइन डैमेज हो सकती है।