वाराणसी। माघ पूर्णिमा के दिन वर्ष का पहला ग्रहण लग रहा है। पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लगने से सूर्योदय के चंद घंटो बाद ही सूतक लग जाएगा और काशी के सभी मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। इसके साथ ही गंगा आरती का समय भी बदल गया है। गंगा आरती शाम छह बजे के बजाय ग्रहण समाप्त होने पर रात नौ बजे होगी। इसका कारण यह है कि ग्रहण का स्पर्श काल यानी आरंभ शाम 5 बजकर 18 मिनट 27 सेकंड पर हो रहा है।
काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि पंडित स्वर्णप्रताप चौबे बताते हैं कि, शास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लगता है जबकि सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले। इस नियम के अनुसार ग्रहण का सूतक 31 जनवरी की सुबह 8 बजकर 18 मिनट पर लग जाएगा। सूतक लगने से पहले ही संकटमोचन मंदिर का पट सुबह 9:15 बजे बन्द होगा और रात को 8:45 बजे पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। उसके बाद साढ़े 3 बजे काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ का कपाट भी बन्द कर दिया जाएगा, माता अन्नपूर्णा का पट साढ़े 3 बजे, काल भैरव साढ़े तीन बजे, अक्षयवट हनुमान साढ़े 3 बजे बन्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही काशी के समस्त देवालयों को ग्रहण के चलते बन्द कर दिया जाएगा। ग्रहण के चलते बाबा विश्वनाथ की साढ़े 7 बजे होने वाली सप्तऋषि आरती तीन बजे होगी। जबकि भोग आरती और शयन आरती समयानुसार होंगे। वही प्रातिदिन होने वाले विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती के समय में भी परिवर्तन किया गया है, यह आरती साढ़े 6 बजे शाम के बजाय 9 बजे रात को होगी।
एक नजर में चन्द्रग्रहण का समय
ग्रहण का स्पर्श काल:- शाम 5 बजकर 18 मिनट 27 सेकंड
खग्रास आरंभ:- शाम 6 बजकर 21 मिनट 47 सेकंड
ग्रहण मध्य: शाम 6 बजकर 59 मिनट 50 सेकंड
खग्रास समाप्त: शाम 7 बजकर 37 मिनट 51 सेकंड
ग्रहण मोक्ष: रात 8 बजकर 41 मिनट 11 सेकंड