वाराणसी। मंडलीय सभागार में शुक्रवार को समीक्षा बैठक के दौरान जब मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग की समीक्षा शुरू की तो सबसे पहले आरटीओ के बारे में पूछा। पता चला कि आरटीओ की जगह एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय बैठक में पहुंचे हैं। इसी पर सीएम ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। पुलिस और परिवहन विभाग चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली में लगा है। अधिकारी अपनी कार्यशैली बदल लें नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान सीएम ने मिर्जापुर जेल में बंद चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि काम करने के तरीके में बदलाव लाओ। वरना आरएस यादव जैसा हाल कर दूंगा। सीएम ने सख्त निर्देश दिए कि ट्रकों और बसों की चेकिंग से पहले शहर में डग्गामारी कर रहे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाएं।
आखिर किसकी शह पर चल रहे हैं डग्गामार वाहन...
वाराणसी। चांदपुर सड़क हादसे में पति और बेटे को गंवाने वाली राजमनी देवी की जिंदगी में दुखों का पहाड़ टूट चुका है। नायब तहसीलदार के आश्वासन के बाद भी अभी तक न उसे सरकार की ओर से मुआवजा राशि मिली न तो किसी सामाजिक संगठन की ओर से मदद। मुसीबतों से घिरने के बाद अब न उसे जीते बन रहा है न मरते। दिल पर पत्थर रखकर वह गुमसुम सी सुबक रही है। अब उसके आंखों की गीली कोर भी सूखने लगी है। त्रयोदशाह के दिन शुक्रवार को एक ओर जहां झोपड़ी से कारुणिक पुकार गूंजती रही, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक के दौरान चांदपुर सड़क हादसे पर परिवहन विभाग के अफसरों को लताड़ लगाई।
सीएम ने समीक्षा बैठक के दौरान पिछले दिनों चांदपुर में पिकअप की टक्कर से पिता-पुत्र समेत तीन की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि आखिर डग्गामार वाहन शहर में किसकी शह पर चल रहे हैं? सीएम ने सख्त निर्देश दिए कि ट्रकों और बसों की चेकिंग से पहले शहर में डग्गामारी कर रहे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाएं। यह सड़क हादसा 24 दिसंबर की सुबह चांदपुर चौराहे पर हुआ था। राजमनि देवी वह मनसूह सुबह को याद कर वह सिहर जाती है। जब चांदपुर चौराहे पर काल बनकर आई पिकअप अनियंत्रित होकर उसकी झोपड़ी में घुस गई थी। उस रोज झोपड़ी के पास आग ताप रहे उसके पति अमरनाथ गौड़ और पुत्र दीपू को पिकअप ने अपनी चपेट में ले लिया था और दोनों काल के गाल में समा गए थे। पड़ोस का एक बच्चा हर्ष भी इस हादसे में चल बसा। इस गरीब परिवार की दर्द भरी दास्तां सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। हादसे में जान गंवाने वाली राजमनि का पति अमरनाथ गौड़ पहले मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। बाद में उसे पक्षाघात हो गया। फिर तीन बेटियों और दो बेटों के परिवार की जिम्मेदारी राजमनी के कंधे पर आ गई। वह घर के बाहर ही भट्ठी लगाकर दाना भूजती और परिवार की जीविका चलाती थी। किसी तरह से जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ रही थी। वह इस उम्मीद में थी कि उसके बुढ़ापे की लाठी बनकर उसका बेटा दीपू तैयार हो रहा था। वह माता पिता का सहारा बनता लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।
चांदपुर में हुई घटना के बाद पारिवारिक लाभ योजन के तहत पीड़ित परिवार को 30 हजार रुपये की मदद की गई थी। मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के लाभ के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें बालिग को पांच लाख रुपये मिलेंगे। मुख्यमंत्री सहायता कोष से मदद के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। -सुनील कुमार वर्मा, एसडीएम सदर
न पीएम रिपोर्ट आई न मृत्यु प्रमाण पत्र मिला
हादसे के बाद नाराज लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर चक्का जाम कर दिया था। तब नायब तहसीलदार ने पहुंचकर चक्का जाम समाप्त करने के लिये मृतकों के आश्रितों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया था। लेकिन हादसे के 13 दिन बीत जाने के बाद भी मृतक अमरनाथ की पत्नी राजमनी को अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरु करने के लिए मुआवजे का इंतजार है। प्रधान आरडी यादव ने बताया कि पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार रुपये मिले है। शेष मुआवजे के लिये पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र का इंतजार है।
दो अन्य घायलों की हालत में सुधार
वाराणसी। इस हादसे में घायल रामजी का बेटा सनी (6) और मुकेश की बेटी स्वाती(6) अब कोमा से बाहर आ गई हैं। इन परिवारों पर भी गरीबी इस कदर हावी थी कि इनके पास इलाज कराने के लिए पैसे नहीं थे। उस दिन थानाध्यक्ष मंडुवाडीह आशुतोष तिवारी और चांदपुर के प्रधान ने नगद पैसे देकर इलाज शुरु करवाया था। 10 दिन तक चले इलाज के बाद दोनों बच्चों का हालत में सुधार आ गया है। बीती चार जनवरी को उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष से निकाल कर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।