वाराणसी। संगीत-कला के लिए समर्पित संस्था शिल्पायन के कलाकारों ने रविवार की रात बेजोड़ आलापचजारी से लोगों को मुग्ध कर दिया। यह संगीत संध्या शिल्पायन और गोकुलदास चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में पराड़कर भवन के सभागार में आयोजित की गई थी।
देवीस्तुति के बाद सुनंदा मिश्रा की ओर से रचित बंदिशों की पहली युगलबंदी जयंतिका दे और डालिया मुखर्जी ने पेश की। राग शुद्ध कल्याण में निबद्ध बंदिश की अवतारणा की। तबले पर संगत की जयदेव मुखर्जी ने। हारमोनियम पर अशोक झा थे। इनके बाद अपूर्वा तिवारी और चारूलता मुखर्जी ने राग मालकौंस में बंदिश पर आलाप लिया। तबले पर पं.किशन रामडोहकर ने संगत की। फिर प्रियांशु घोष और प्राप्ति पुराणिक ने दो अलग-अलग रागों की मूर्छना पद्धति पर आधारित प्रस्तुति की। प्रियांशु घोष ने राग आभोगी कान्हड़ा के स्वरों के साथ कार्यक्रम को सजाया तो दूसरी ओर प्राप्ति पुराणिक ने इसी राग की मूर्छना पद्धति से प्राप्त राग कलावती को थामे रखा। पं. देवाशीष दे और हरि नारायण सारडा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।