वाराणसी। गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर ने रविवार को कहा कि सनातन धर्म के प्रचार और राष्ट्र के उत्थान की दिशा में धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। वह सनातनी धर्म गुरु के साथ सच्चे राष्ट्रवादी भी थे। वह श्रेष्ठ लेखक थे और कुशल राजनीतिज्ञ भी। उनके जीवन दर्शन से युवा पीढ़ी को सीख लेनी चाहिए।
केदार घाट स्थित करपात्र धाम में धर्म सम्राट की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय परिसंवाद के समापन अवसर पर संतों-बटुकों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आने वाले समय में विश्व गुरु की प्रतिष्ठा को प्राप्त करेगा। देश का भविष्य ऐसे ही सत्यनिष्ठ वेदज्ञों के हाथ में सुरक्षित है। उन्होंने आध्यात्मिक नगरी काशी की संस्कृति और परंपराओं को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि गोवा के बारे में लोगों के दिमाग में सिर्फ पर्यटन है लेकिन गोवा भी काशी की ही तरह मंदिरों का शहर है। सनातन परंपरा गोवा में सुरक्षित है।
बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि करपात्री जी का जन्म सनातन धर्म के विस्तार और भारत के उत्थान के लिए हुआ था। बताया कि इलाहाबाद में शैक्षणिक काल में ही वह धर्म सम्राट के जीवन दर्शन से प्रभावित हुए थे। केंद्रीय सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्यालु ने बताया कि विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने धर्म सम्राट के व्यक्तित्व के बारे में आंध्र प्रदेश में चर्चा सुनी थी। स्वामी सहजानंद सरस्वती सामाजिक न्याय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोहित सिंह ने धर्मसम्राट के जीवन दर्शन पर विस्तार से रोशनी डाली। कहा कि रामराज परिषद का गठन कर स्वामी जी ने स्वच्छ और पारदर्शी राजनीति की दिशा दी थी। इस दौरान अतिथियों को अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रो. जेपी राय, प्रो. केके पांडेय, सत्यम अवस्थी, राहुल शुक्ला, अशोक पाठक, सुधा पाठक, संदीप ब्रह्मचारी समेत तमाम लोग उपस्थित थे। अध्यक्षता अभिषेक ब्रह्मचारी ने की।