फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: एक साल में 10 हजार नमूने की जांच, सुधर रही मिट्टी की सेहत

विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व मृदा दिवस आज
विज्ञापन

पोषक तत्वों से युक्त है मिट्टी, पोटास, नाइट्रोजन, कार्बन और फाॅस्फोरस में आया है सुधार, आयरन की है कमी

फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। जिले की मिट्टी की सेहत सुधर रही है। एक साल में 10 हजार नमूने की जांच हुई। रिपोर्ट बताती है कि अभी तक जिन तत्वों की कमी थी, उनमें लगातार सुधार हो रहा है। इसके चलते रबी, खरीफ और जायद की फसलों में 10 से 15 फीसदी की औसत वृद्धि हुई। अभी मिट़्टी में पोटाश पर्याप्त मात्रा में है। ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फाॅस्फोरस के अलावा सूक्ष्म तत्वों की मात्रा बढ़ने से फसलों पर बेहतर प्रभाव पड़ा है। हालांकि, अभी भी आयरन की कमी बनी हुई है।
10 साल से बनारस की मिट्टी में विभिन्न तत्वों की कमी थी, लेकिन किसानों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं से इसमें उत्तरोत्तर सुधार हुए हैं। क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक मृदा, राजेश राय ने बताया कि हर साल ब्लाॅकवार मिट्टी की जांच किए जाने से किसान जागरूक हुए हैं। इससे मिट्टी में आवश्यक तत्वों की मात्रा पहले से काफी बढ़ी है। नतीजतन अब सुधार दिख रहा है। इस बार आठों ब्लाॅक से एक-एक हजार मिट्टी के नमूने का परीक्षण हुआ। दो हजार से अधिक नमूने की एनजीओ और किसानों ने खुद जांच करवाई। सभी की रिपोर्टों में सुधार आया है। उन्होंने बताया कि ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन फाॅस्फोरस के अलावा सूक्ष्म तत्वों को लगातार बढ़ाने की जरूरत है, तभी आगे और सुधार हो सकता है।
विज्ञापन


5 साल में हो जाएगा सामान्य
जिले की मिट्टी में सुधार को देखते हुए आगे और बेहतर हो सकता है। राजेश राय ने बताया कि पांच साल में मिट्टी की जरूरत के लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे। अतिरिक्त तत्वों की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए किसान रासायनिक उर्वरक के बजाय हरी खाद, वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करें। बताए जा रहे वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो मिट्टी के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा।

फसल चक्र से होगा और बेहतर
किसान खेती में पहले से चली आ रही फसल चक्र की परंपरा को कायम रखते हुए इसे अपनाएं। राजेश राय ने बताया कि फसल चक्र का मतलब साल के दोनों सीजन में बदल कर फसलों की बोआई करें। एक सीजन में छोटी और दूसरे में लंबी जड़ वाली फसलें बोएं। इससे मिट्टी अपने पोषक तत्व को प्राप्त कर लेती है। यदि तीन सीजन में फसल उगाते हैं तो उसे जरूरी तत्व दें। इसी से मिट्टी की औसत क्षमता कायम रहेगी।
विज्ञापन


वर्जन
कृषि विभाग की योजनाएं और किसानों में जागरूकता आने से मिट्टी में सुधार हो रहा है। हालांकि, जिन तत्वों की कमी है, उसके लिए प्रयोग लगातार करने होंगे। ऐसे ही हम संपूर्ण सुधार की ओर बढ़ सकते हैं। - राजेश राय, सहायक निदेशक मृदा, क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें