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उत्तर प्रदेश के 26 जिलों के किसान मक्का और उड़द की फसल नहीं काट पाए, आवारा पशु कर गए हजम

Thu, 01 Oct 2020 07:19 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के मुद्दे जोर-शोर से उठाने वाले चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक फरमान ने उत्तर प्रदेश के किसानों का न केवल खेती का बजट बिगाड़ा, बल्कि पशुधन तबाह करके रख दिया है...
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गौशाला - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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जौनपुर, आजमगढ़, बनारस, चंदौली, गाजीपुर, मऊ समेत पूर्वींचल के 26 जिलों के किसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सख्त नाराज हैं। वरिष्ठ पत्रकार और किसान श्याम नारायण पांडे बताते हैं कि किसानों के बच्चे भुट्टा खाने, मक्का के दाने का भूजा खाने और मक्का के आटे की रोटी खाने के लिए तरस गए हैं।

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खेत में उड़द बोया, लेकिन न तो घर में उड़द में आई और न ही पशुओं को चारा मिल पा रहा है। कारण साफ है। किसानों ने पहले तो छुट्टा पशुओं के डर से फसल नहीं बोई। जिसने फसल की बुआई भी की, उनके हाथ खेत से खाली ही आए।

 

जौनपुर में नौपेड़वां के पास के विनोद सिंह बताते हैं कि झुंड के झुंड जानवर आते हैं। रात में एक दो घंटे में पूरे खेत की खड़ी फसल खा जा रहे हैं। बनारस में संजय सिंह का भी यही कहना है। संजय सिंह का गांव बरसठी में है। संजय सिंह स्कूल में मास्टर हैं। पिता जी खेती करते हैं, लेकिन वह कहते हैं कि जब से गांव में छुट्टा गाय-बछड़े का झुंड घूमने लगा है किसान के पास खेती में खाने भर का भी बच पाना मुश्किल हो रहा है।

 

आजमगढ़ में फुलेश, जैगहां का भी यही हाल है। खेता सराय, मानीगुरैनी से लेकर शाहगंज में सुरिस से लेकर कादीपुर तक काफी उपजाऊ जमीन है। लेकिन क्षेत्र के किसान छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। मिर्जापुर के दिनेश मौर्या का कहना है कि अरहर की खेती करने में डर लगने लगा है। गेहूं, ज्वार, बाजरा की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। प्रयागराज में संघ के नेता ज्ञानेश्वर शुक्ला हैं। शुक्ला का भी कहना है कि छुट्टा पशुओं ने किसानों का बैलेंस बिगाड़ दिया है। शुक्ला कहते हैं कि 2022 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। राज्य सरकार को इसके पहले एक प्रभावी नीति लानी चाहिए।

 

गाजीपुर निवासी विनोद दुबे मोहम्मदाबाद क्षेत्र से हैं। विनोद दूबे के पास पुश्तैनी उपजाऊ जमीन है। अच्छी खेती किसानी करते आए हैं, लेकिन विनोद दूबे बताते हैं कि पिछले दो-ढाई साल से खेती खलिहानी की स्थिति बहुत खराब हो गई है। चंदौली के अंबिका प्रसाद की भी यही शिकायत है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भी हाल बुरा

बागपत के सूप गांव के निवासी डा. सुधीर तोमर होम्योपैथ के चिकित्सक हैं। डा. तोमर गांव की खेती में बड़ी रुचि लेते हैं। लेकिन डा. तोमर का कहना है कि उनके पूरे गांव में 25-30 की झुंड में छुट्टा पशु घूम रहे हैं। पूरे क्षेत्र में यही हालत है। डा. तोमर का कहना है कि रखवाली के तमाम उपायों के बाद भी अवसर पाते ही छुट्टा पशु पूरी खेती चौपट कर देते हैं। डा. तोमर का कहना है कि भूख जानवरों से भी बर्दाश्त नहीं होती। ऐसे में वे कभी कभी बुरी तरह से हमला भी कर देते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के मुद्दे जोर-शोर से उठाने वाले चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक फरमान ने उत्तर प्रदेश के किसानों का न केवल खेती का बजट बिगाड़ा, बल्कि पशुधन तबाह करके रख दिया है। दूध का कारोबार भी अब घाटे का सौदा बन गया। चौधरी कहते हैं कि ऊपर से केंद्र सरकार किसानों से जुड़ा तीन कानून लेकर आई है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर प्रावधान ही नहीं है। लिहाजा अब किसान की कमर टूटनी भी तय है।

 

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