इसे भाजपा की स्थानीय जातीय और राजनीतिक समझ कहें या पार्टी की अंदरुनी खींचतान, देवचरा में आयोजित रैली में भाजपा नेताओं ने नरेंद्र मोदी (नमो) फैक्टर से दूरी बनाए रखी। रैली में राजनाथ और वरुण की जमकर जय-जयकार हुई।
रैली में नरेंद्र मोदी की चर्चा नहीं हुईं तो पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ ही आम लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। पार्टी का एक तबका मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार सुनने की आस लगाए बैठा था।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली में इसकी अपेक्षा कुछ अधिक थी लेकिन राजनाथ ही नहीं वरुण गांधी, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी, पूर्व सांसद संतोष गंगवार व अन्य वक्ताओं ने भी अपने संबोधन में मोदी का जिक्र तक नहीं किया। हालांकि, मोदी मंच पर लगे बैनर में जरूर दिखाई दिए।
मोदी केस्थान पर कल्याण का नाम राजनाथ ने अपने भाषण में कई बार लिया। बड़े नेताओं के इस रुख को पूर्वनियोजित माना जा रहा है।
पार्टी के चुनाव प्रबंधक मानते हैं कि आंवला लोकसभा क्षेत्र से जुड़े बदायूं, बरेली आदि इलाकों में अल्पसंख्यक वोटबैंक काफी प्रभावी है।
जिस तरह सपा से टूटकर धर्मेंद्र कश्यप ने भगवा चोला ओढ़ा है, संकेत साफ हैं कि उन्हें आंवला से टिकट मिलेगा। उनके मुस्लिम वोटर नाराज न हों, इसलिए रैली से नरेंद्र मोदी फैक्टर को दूर रखा गया है।
वहीं राजनाथ की जय-जयकार भी आंवला लोकसभा क्षेत्र में राजपूत वोटबैंक को ध्यान में रखकर ही कराई गई।