आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन मामले में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने इस संबंध में जानकारी दी।
वहीं, इस मामले में पड़ रहे चौतरफा दबाव के बावजूद भी उत्तर प्रदेश सरकार पीछे न हटते हुए दुर्गाशक्ति के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर सकती है।
सांप्रदायिक रूप से संवदेनशील परिस्थितियों में ठीक से व्यवहार न करने पर सरकार दुर्गाशक्ति के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर सकती है।
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि रमजान के महीने और कांवड़ियों की यात्रा के दिनों में सांप्रदायिक सदभाव को बनाए रखने के लिए अलर्ट भेजा गया था। इसके बावजूद बिना किसी प्रक्रिया को पूरा किए एक पूजास्थल को गिरा दिया गया। इसके लिए दुर्गाशक्ति के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया जाएगा।
अधिकारी ने बताया की अगर राज्य सरकार उनके (दुर्गाशक्ति) जवाब से संतुष्ट नहीं होती है तो मामले में उनकी भूमिका की जांच कराई जाएगी। उनके निलबंन का फैसला पूरी तरह प्रशासनिक है और इसका माफिया के खिलाफ की गई उनकी कार्रवाई से कुछ लेना देना नहीं है।
गौतमबुद्घनगर की सब डिविजनल मजिस्ट्रेट दुर्गाशक्ति नागपाल के आदेश पर 27 जुलाई को स्थल की दीवार गिराई गई थी।
कई लोगों ने किया फैसले का विरोध
सरकार ने यह कदम तब उठाया है जब कई जगहों से दुर्गाशक्ति के निलंबन को रद्द करने की मांग की जा रही है।
इंडियन सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव एसोसिएशन (केंद्र) के सचिव संजय भूस ने कार्यवाहक मुख्य सचिव आलोक रंजन से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बनाए रखने के लिए दुर्गाशक्ति का निलंबन रद्द करने की मांग की थी।
सरकार पर आईएएस एसोसिएशन के साथ ही राजनीतिक दलों का दबाव भी है। साथ ही तमाम सोशल साइट पर लोग अपनी प्रतिक्रिया देने के साथ ही सरकार को घेर रहे हैं।
यह मामला अदालत भी पहुंच चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर केंद्र सरकार को नागपाल के निलंबन मामले में विस्तृत जानकारी लेने और फैसला अवैध होने पर निलबंन रद्द करने का आदेश देने की मांग की गई है।