उत्तर प्रदेश में अब डीएम होमगार्ड का निष्कासन नहीं कर पाएंगे। वर्ष 2009 में बसपा सरकार ने होमगार्ड कमांडेंट से यह अधिकार छीनकर जिलाधिकारियों को दे दिया था।
लेकिन सपा सरकार ने यह फैसला बदलते हुए वापस कमांडेंट का कद बढ़ा दिया है। दुर्गा शक्ति प्रकरण के बाद आईएएस लॉबी पर यह दूसरा अटैक माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 1962 में होमगार्ड विभाग खड़ा किया गया था। हर जिले में जिला कमांडेंट की नियुक्ति की गई। क्योंकि नियुक्ति का अधिकार भी कमांडेंट को है लिहाजा निष्कासन की अथारिटी भी उन्हें ही बनाया गया।
लेकिन वर्ष 2009 में बसपा सरकार ने कमांडेंट से यह अधिकार छीनकर जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। बगैर डीएम की परमिशन के होमगार्ड को निष्कासित नहीं किया जा सकता था। इससे विभाग में अनुशासनहीनता आ गई।
कमांडेंट के आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे थे होमगार्ड। क्योंकि उन पर किसी कार्रवाई का अधिकार नहीं रह गया था। इस मुद्दे को लेकर होमगार्ड विभाग के अफसर लगातार शासन में पैरवी कर रहे थे।
अब सरकार ने बसपा सरकार के फैसले को पलट दिया है। डिवीजनल कमांडेंट होमगार्ड संतोष कुमार ने बताया कि सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। अब कमांडेंट को होमगार्ड पर कार्रवाई के लिए डीएम के अनुमोदन की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। वह सीधे नोटिस जारी करके एक्शन ले सकेंगे।