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यूपी: एसआईआर की लड़ाई को चुनावी मुद्दा बनाने के संकेत, यहां धमक दिखाने में पीछे नहीं रहे अखिलेश यादव

Mon, 02 Nov 2026 09:33 AM IST
Sharukh Khan अजीत खरे, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एसआईआर की लड़ाई को चुनावी मुद्दा बनाने के संकेत निकले हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान से यूपी के रण का शंखनाद हो गया है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव राष्ट्रीय राजनीति में धमक दिखाने में पीछे नहीं रहे।
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Akhilesh Yadav - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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इंडिया गठबंधन की महारैली में वोट चोरी के सवाल पर दिखे तेवर व एकजुटता विपक्षी राजनीति को नई दिशा दे सकती है। विपक्षी दलों की इस बड़ी जुटान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की हल्दीघाटी बताकर 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव का सियासी संकेत भी दे दिया। 
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अब पीडीए, एमएलसी चुनाव के नतीजे, चंदा चोरी व वोट चोरी के मुद्दे को शिद्दत से उछाला जाएगा। रामलीला मैदान की एकजुटता उत्तर प्रदेश के गांवों, कस्बों और बूथों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाती है। यह यूपी के सपा कांग्रेस गठबंधन के लिए चुनौती है। 

अखिलेश ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव केवल भाजपा बनाम सपा की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र, मताधिकार और विपक्षी एकजुटता का भी चुनाव होगा। अखिलेश ने रैली में उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम कटने के दावे को लेकर भाजपा को घेरने की कोशिश की। 
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बोले, यदि इतनी बड़ी संख्या में वोट कटे हैं तो इसका विधानसभा क्षेत्रों पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है। उन्होंने 403 विधानसभा सीटों का गणित सामने रखते हुए कहा कि औसतन प्रत्येक सीट पर करीब 31 हजार मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का सवाल है।
 

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में प्रचारित करने की रणनीति
सपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों का मुद्दा खासा अहम है। पार्टी ने इस खास रणनीति के तहत जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और चुनावी निष्पक्षता प्रभावित करने के तौर पर प्रचारित कर रही है। 

 

खासकर ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और कमजोर सामाजिक समूहों के मताधिकार को लेकर विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना सकता है। अखिलेश ने कहा, जो लोग कहकर आए हैं कि अंगद का पैर है, वे जानते हैं कि जमीन ही नहीं बची है तो अंगद का पैर कहां रखोगे? 

 
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यह कह कर सपा ने एमएलसी चुनाव के नतीजों की ओर इशारा भी किया। भाजपा के मजबूत बूथ प्रबंधन और संगठनात्मक नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए सपा खासा जोर लगा रही है।
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