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Dara Singh Chauhan Resigns : बसपा से चुनाव हारे, भाजपा में आते ही पहले विधायक फिर मंत्री बन गए, पढ़िए चौहान का राजनीतिक सफर

सार

UP Minister Dara Singh Chauhan Resigns : उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आते ही नेताओं का दल बदलने का सिलसिला तेज हो गया है। कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और नौ विधायकों के इस्तीफे के बाद भी ये सिलसिला जारी है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर दारा सिंह चौहान। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी को दो दिन में दूसरा बड़ा झटका लगा है। योगी कैबिनेट के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद अब योगी सरकार के वन, पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने भी इस्तीफा दे दिया है। दारा सिंह मऊ की मधुबन विधानसभा से 2017 में विधायक चुने गए थे। स्वामी प्रसाद मौर्य की तरह दारा सिंह चौहान भी पिछले विधानसभा चुनाव में दल बदलकर भाजपा में शामिल हुए थे। पढ़िए दारा सिंह चौहान का पूरा राजनीतिक सफर...
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आजमगढ़ में जन्म, मऊ को बनाया कर्मभूमि
दारा सिंह चौहान का जन्म 15 जुलाई 1963 को आजमगढ़ के गेलवारा गांव में हुआ था। इन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई की है। पिछड़ी जाति से आते हैं। पिता राम किसुन चौहान किसान थे। घर में पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। 



भाजपा से हारे, भाजपा में ही सम्मान मिला
दारा सिंह चौहान पहली बार 1996 में राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद 2009 से 2014 तक बसपा के टिकट पर मऊ की घोसी लोकसभा सीट से सांसद रहे। 2014 में भी बसपा से ही चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। तब भाजपा प्रत्याशी हरिनारायण राजभर ने चौहान को 1.45 लाख वोटों से हराया था। 2017 चुनाव से पहले दारा सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया। पार्टी ने उन्हें पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया। 2017 विधानसभा चुनाव मधुबन सीट से भाजपा के टिकट पर लड़े और जीत हासिल की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में इन्हें वन, पर्यावरण मंत्री भी बनाया गया।
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लूट, डकैती समेत कई धाराओं में मामला दर्ज है
2017 के विधानसभा चुनाव में चौहान ने जो हलफनामा दायर किया था। उसके मुताबिक उनके ऊपर लूट, डकैती, छिनैती, सरकारी काम में बाधा डालने समेत 21 अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज है। हलफनामें के मुताबिक चौहान के पास दो करोड़ 75 हजार से ज्यादा चल और अचल संपत्ति है।

चौहान ने इस्तीफे का क्या कारण बताया 
अपने इस्तीफे में चौहान ने कहा कि योगी सरकार में पिछड़ों, वंचितों, दलितों, किसानों और बेरोजगार नौजवानों के साथ के प्रति उपेक्षात्मक रवैया अपनाया गया है। पिछड़े और दलितों के आरक्षण के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। इन बातों से नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा देने का एलान किया।
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