मुजफ्फरनगर में जाना-माना चेहरा हैं सुशील कुमार सिल्लो। चुनावी कवरेज के दौरान अमर उजाला की टीम को सब्जी मंडी में मिल गए। सवाल था कि मुजफ्फरनगर में 2013 के दौरान हुए दंगों के बाद लोगों का आपस में भरोसा कितना मजबूत हुआ है, क्या आज लोग उस स्थिति में पहुंच गए हैं कि कोई चिंगारी डाल दे, तो लोग उसे आगे नहीं बढ़ने देंगे? अब सिल्लो की बारी थी। शुरू हुए तो बोलते ही चले गए। भरोसा न होता तो हम 'मुल्लाजी' के रिक्शे में 20-20 बच्चे स्कूल न भेजते। जब देश आजाद हुआ तो चार-पांच लाख कत्ल हो गए थे। उसके बाद हिंदू-मुस्लिम भाईचारे में कमी नहीं हुई। मैं सब्जी लेने आया, मुसलमान की दुकान पर आया हूं। पुताई वाला कौन आ रहा है, वो भी 'नौशाद' आ रहा है। कहीं 'शमशाद' आ रहा है। भाईचारे में कमी नहीं है। उन्होंने कहा, आज के 'मुजफ्फरनगर' में 'गंगा-जमुनी तहजीब' मौजूद है।
करते दो 'जन' हैं, फंसते सौ 'जन' हैं
मुजफ्फरनगर में गुरुवार को वोट पड़ेंगे। चलिये 'सिल्लो' की बात को आगे बढ़ाते हैं। ये बात सही है कि आज चुनाव में फायदा उठाने के मकसद से लोगों के बीच भरोसे की डोर को हिलाने का प्रयास हो रहा है। अगर दस लोग खड़े हैं और उनमें से दो लोग पत्थर फेंक देते हैं तो वहीं से दंगे की शुरुआत हो जाती है। शरारत करने वाले अपने बीच से ही तो हैं। दो लफंगे ईंट फेंक देंगे, सारा माहौल बिगाड़ देते हैं। दूसरे लोगों का दिमाग खत्म कर देते हैं। करते दो 'जन' हैं, फंसते सौ 'जन' हैं। कोई आदमी लड़ना नहीं चाहता।
लड़ाई तो दो के बीच है, कौन किसे वोट देगा, ये भी पता है
शहर का 'कंपनी बाग', यहां पर अल सुबह सैर करने वाले लोगों से 'मुजफ्फरनगर' और 'चुनाव' को लेकर बातचीत हुई। डॉक्टर साहब बोले, देखो जी कल वोटिंग होनी है। फाइट दो के बीच है। राष्ट्रीय लोकदल और भाजपा के बीच में फाइट है। हो सकता है बाकी का नंबर न आए। गठबंधन पर मुस्लिम वोट पड़ेगा, बाकी वोट भाजपा को मिलेंगे। वैसे हिंदू-मुस्लिम के बीच प्यार में कमी नहीं है। राजनीति में च्वाइस होती है, बस वही है। अपनी-अपनी पसंद है कोई 'भाजपा' पर जा रहा है तो कोई 'गठबंधन' पर जा रहा है। व्यायाम कर रहे युवाओं ने कहा, भर्ती जल्दी आनी चाहिए। सरकार, इस पर ध्यान दे कि युवाओं का नुकसान न होने पाए।
एक अन्य साहब बोले, मौजूदा सरकार में गुंडागर्दी बंद हुई है। लोग विकास पर वोट देंगे। हिंदू-मुस्लिम बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन महंगाई को लोग समझ रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के लिए मेरठ जाना पड़ता है। इस सरकार में झगड़े का तो कोई मतलब नहीं है। सबका अच्छा व्यहार है। साल 2017 के बाद प्रदेश में अपराध पर अंकुश लगा है।